वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर होगा शूटर जसपाल राणा का अंतिम संस्कार, जानिए इसके पीछे की भावुक वजह उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
पद्मश्री और दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का अंतिम संस्कार उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। देहरादून से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हो चुकी है और शिष्या मनु भाकर समेत कई हस्तियां अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं।

उत्तराखंड के नामी निशानेबाज और पद्मश्री जसपाल राणा के निधन से खेल जगत से लेकर आम लोगों तक हर कोई शोक में डूबा है। उनका अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। बताया जा रहा है कि उनका पार्थिव शरीर देहरादून से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेगा और वहां से सड़क मार्ग के जरिए मणिकर्णिका घाट ले जाया जाएगा, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद मुखाग्नि दी जाएगी।

देहरादून से शुरू हुई अंतिम यात्रा

देहरादून में आज सुबह 10:30 बजे उनकी अंतिम यात्रा आरंभ हुई। इस भावुक मौके पर उनकी शिष्या और ओलंपियन मनु भाकर भी अपने गुरु के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। इस दौरान जसपाल राणा के पिता नारायण राणा ने उन्हें ढांढस बंधाया।

गांव पहुंचते ही उमड़ा शोक का सैलाब

इससे पहले शुक्रवार शाम करीब 7:45 बजे उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से देहरादून के पोंदा क्षेत्र स्थित मझोन गांव पहुंचा था। यहां देर रात तक अंतिम दर्शन के लिए खिलाड़ियों, राजनीतिक नेताओं और शुभचिंतकों का तांता लगा रहा।

बेटे को आखिरी बार देखकर पिता नारायण सिंह राणा खुद को संभाल नहीं पाए। उनकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे और सिसकते हुए वह अपने पैरों पर भी ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य, रिश्तेदार, मित्र और गांववासी भी फफक-फफककर रो पड़े। जिस गांव ने अपने बेटे को विश्व पटल पर भारत का गौरव बनते देखा था, आज उसी गांव की आंखें नम थीं।

मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार क्यों

जसपाल राणा का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर उनकी आखिरी इच्छा के अनुरूप किया जा रहा है। उनके चाचा राजेंद्र राणा ने बताया कि जसपाल राणा ने कई बार यह इच्छा जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर ही हो। इसी कारण परिवार ने वाराणसी में अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।

11 दिन अस्पताल में रहे भर्ती

जसपाल राणा (49) का निधन शुक्रवार सुबह हुआ था। वे पिछले 11 दिनों से दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती थे। जर्मनी से लौटते समय फ्लाइट में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।

भारतीय निशानेबाजी का चमकता सितारा

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके नाम 600 से अधिक पदक दर्ज हैं। साल 1994 में मिलान में हुई जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतने के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उसी वर्ष हिरोशिमा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान कायम की।

मुख्यमंत्री धामी समेत कई हस्तियां पहुंचीं

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उनके घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने जसपाल राणा के निधन को देश और उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा की उपलब्धियां और उनका जज्बा हमेशा युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा।

इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, कैबिनेट मंत्री खजान दास और विधायक सहदेव सिंह पुंडीर समेत कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और खेल जगत की हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर शुक्रवार को ही अपने कोच को अंतिम विदाई देने देहरादून पहुंच गई थीं। कोच के पार्थिव शरीर को देखकर वह खुद को रोक नहीं पाईं और जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा से लिपटकर रो पड़ीं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!