बंद पड़े मुर्गी फार्म से उठती दुर्गंध ने गांव को बनाया नरक, हजारों मुर्गियों की मौत से महामारी का खतरा बिहार 2 घंटे पहले 1
वैशाली के फटिकबारा गांव में ओम प्रकाश लेयर फार्म बंद होने के बाद हजारों मुर्गियां दाना-पानी के अभाव में मर गईं, जिससे भीषण दुर्गंध फैल रही है और महामारी का खतरा मंडरा रहा है। एसडीओ ने फार्म सील कर दिया है, मगर सफाई का काम अब भी अधूरा पड़ा है।

वैशाली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक मुर्गी फार्म पूरे गांव के लिए मुसीबत बन गया है। प्रशासनिक लापरवाही किस तरह आम लोगों के जीवन पर भारी पड़ सकती है, इसकी जीती-जागती मिसाल देशरी प्रखंड की जफराबाद पंचायत के फटिकबारा गांव में देखी जा सकती है। यहां एक बंद लेयर फार्म में हजारों की संख्या में मरी हुई मुर्गियों के कारण गांव में महामारी फैलने का खतरा खड़ा हो गया है।

दुर्गंध से दूभर हुआ जीवन

आसपास रहने वाले लोगों के लिए दुर्गंध इतनी असहनीय हो गई है कि सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद फार्म संचालक मरी हुई मुर्गियों को हटाने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, जिम्मेदार अधिकारी भी इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे। दाना-पानी न मिलने के कारण फार्म की हजारों मुर्गियां दम तोड़ चुकी हैं, जिनसे उठती भारी दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

एसडीओ के आदेश के बाद भी नहीं हटीं मुर्गियां

अनुमंडल दंडाधिकारी के आदेश पर लेयर फार्म को बंद तो कर दिया गया। लोगों के जीवन पर मंडराते संकट को देखते हुए एसडीओ ने जांच कराई और अधिकारियों के जांच प्रतिवेदन के आलोक में फार्म को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करने का आदेश दिया। मगर फार्म मालिक ने मुर्गियों को वहां से नहीं हटाया, जिसके चलते वे मरने लगीं और अब हजारों मुर्गियां मौत के मुंह में जा चुकी हैं।

ग्राम सभा में लिया गया फार्म बंद करने का प्रस्ताव

पंचायत ने ग्राम सभा कर जनहित में इस फार्म को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया है। लेकिन मरी हुई मुर्गियों को आखिर हटाया कैसे जाए, इस सवाल को लेकर कोई भी जिम्मेदार गंभीर दिखाई नहीं देता।

शुरू से ही था स्थानीय विरोध

यह फार्म ओम प्रकाश लेयर फार्म के नाम से ओमप्रकाश सिंह चला रहे थे। जब इसकी शुरुआत की गई थी, तभी स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। इसके बावजूद फार्म खोल दिया गया। बाद में जब इससे दुर्गंध उठने लगी और मक्खियों की तादाद बढ़ने लगी, तो आसपास के लोग परेशान होने लगे।

थाने से लेकर मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत

ग्रामीणों ने इसकी शिकायत देशरी के थानाध्यक्ष, अंचल अधिकारी, बीस सूत्री अध्यक्ष, बीडीओ, सीओ, महनार एसडीओ, जिले के डीएम और मुख्य सचिव तक से की। अधिकारियों ने शिकायत के आधार पर जांच की। इसके साथ ही अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में वाद संख्या 01/2025 के तहत धारा 152 बीएनएसएस में मामले की सुनवाई भी हुई।

तीन सदस्यीय टीम की जांच और सीलिंग

एसडीओ ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर पूरे मामले की दोबारा जांच कराई। सभी पक्षों को सुनने और जांच प्रतिवेदन के आलोक में एसडीओ ने 14 मई 2026 को अंडा फार्म को तुरंत स्थानांतरित करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद भी जब फार्म नहीं हटाया गया, तो एसडीओ और एसडीपीओ देशरी थाने की पुलिस के साथ खुद मौके पर पहुंचे और अंडा फार्म को सील कर दिया।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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