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एक महीने पहले
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अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष एक नई और खतरनाक दिशा में मुड़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कुल 140 सैन्य ठिकानों पर भीषण हमला किया है। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज को अपना निशाना बनाया था। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद यह अमेरिका द्वारा ईरान पर किया गया तीसरा बड़ा सैन्य हमला है। अमेरिकी सेना ने मुख्य रूप से बुशहर स्थित IRGC के बेस को लक्ष्य बनाया है, जो ईरान की सैन्य ताकत का एक अहम केंद्र माना जाता है।
हमले का मकसद और क्षेत्रीय प्रभाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन हमलों का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त करना है, जिनका उपयोग वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को डराने या उन पर हमला करने के लिए करता है। अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान के कई शहरों में तबाही के संकेत मिले हैं। बंदर अब्बास और सिरिक में लगातार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि केशम द्वीप पर भी भीषण विस्फोट हुए हैं।
ईरान का जोरदार पलटवार
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी आक्रामक रणनीति अपनाते हुए पलटवार किया है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं। इस जवाबी कार्रवाई के बाद पूरे मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि कतर के आंतरिक मंत्रालय ने सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों से अपने घरों में रहने या सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है। कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में भी बड़े धमाकों की गूंज सुनाई दी है, जिसके चलते खाड़ी देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने में लगे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और बिगड़ते हालात
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने एक बार फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहेंगे, तब तक किसी भी जहाज की आवाजाही पर रोक रहेगी। पिछले शनिवार को IRGC की नौसेना ने उस जहाज पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई थीं, जो अपने मार्ग से भटक गया था।
तनाव के बीच कूटनीतिक संकट
मध्य-पूर्व में जारी लगातार गोलाबारी के कारण शांति के लिए किया गया अंतरिम समझौता लगभग टूटता हुआ नजर आ रहा है। इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कसम खाई है कि वे अपने पिता और ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का बदला लेना जारी रखेंगे। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल हमलों में हुई थी। यह बयान तब आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को और अधिक मिसाइल हमलों की धमकी दी है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान भी समर्थकों ने डोनाल्ड ट्रंप को मारने की मांग उठाई थी।
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