मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन नगर निगम का बड़ा कदम
मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 के विशाल आयोजन को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे के विकास का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रस्तावित एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजना के मार्ग में एक धार्मिक स्थल के निर्माण का हिस्सा सामने आया है। शाही मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम के बाद अब नगर निगम ने उज्जैन स्थित फलादिया मस्जिद के प्रबंधन को औपचारिक नोटिस थमा दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, फ्लाईओवर के तय एलाइनमेंट में मस्जिद का 224 वर्ग मीटर का निर्माण कार्य रुकावट पैदा कर रहा है। इसके बाद अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।
नगर निगम द्वारा जारी नोटिस की मुख्य बातें और तारीखें
प्राप्त विस्तृत जानकारी के मुताबिक, उज्जैन नगर निगम प्रशासन की ओर से यह नोटिस 23 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से जारी किया गया था। इस जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मस्जिद के भूतल पर स्थित 16 मीटर चौड़े और 14 मीटर गहरे निर्माण भाग को हटाया जाना एलाइनमेंट के लिए बेहद जरूरी है। नगर निगम ने मस्जिद प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे 27 अक्टूबर को अपनी संपत्ति से संबंधित सभी आवश्यक और वैध दस्तावेजों के साथ निगम मुख्यालय में अधिकारियों के सामने उपस्थित हों। अधिकारियों का कहना है कि प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले कागजातों की बारीकी से जांच-पड़ताल की जाएगी और उनके पक्ष को विस्तार से सुना जाएगा, जिसके आधार पर ही आगे की विधिक कार्रवाई तय होगी।
100 साल पुरानी मस्जिद और दुकानों की आजीविका का सवाल
दूसरी ओर, मस्जिद की देखरेख करने वाले प्रबंधन पक्ष ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए दावा किया है कि फलादिया मस्जिद लगभग 100 साल पुरानी एक ऐतिहासिक संरचना है। प्रबंधन का यह भी कहना है कि इस मस्जिद के परिसर में ही करीब छह दुकानें भी संचालित हो रही हैं, जो कई दशकों से यहां बनी हुई हैं। इन दुकानों के माध्यम से कई स्थानीय परिवारों का जीवन यापन होता है और उनकी दैनिक रोजी-रोटी इसी व्यापार से पूरी तरह जुड़ी हुई है। फ्लाईओवर निर्माण की संभावित कार्रवाई के कारण इन दुकानदारों के भविष्य और उनके चलते हुए कारोबार पर गहरा संकट मंडराने की आशंका जताई जा रही है, जिससे स्थानीय व्यापारियों में चिंता बनी हुई है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार
दरअसल, वर्ष 2028 में आयोजित होने जा रहे भव्य सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए उज्जैन शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने, सड़कों को चौड़ा करने और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने से जुड़ी परियोजनाओं को गति दी जा रही है। जिला प्रशासन और नगर निगम का मुख्य उद्देश्य यह है कि महाकुंभ के दौरान देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को बेहद आसान और सुगम बनाया जा सके। हालांकि, इस निर्माण पथ में आ रही विभिन्न इमारतों और संरचनाओं को हटाने की प्रक्रिया से स्थानीय स्तर पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। फलादिया मस्जिद के संदर्भ में फिलहाल शुरुआती नोटिस दिया गया है, जिसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों की सुनवाई के पश्चात नगर निगम का क्या फैसला आता है।
शाही मस्जिद के दौरान हुआ पिछला घटनाक्रम
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने भी उज्जैन जिले के भीतर स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का अभियान चलाया गया था, जिस दौरान स्थानीय स्तर पर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था। उस समय मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए पथराव करने वाले उपद्रवियों और सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो वायरल करने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए कानूनी शिकंजा कसा था।
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