मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
राष्ट्रपिता को अनोखी श्रद्धांजलि
पूरे देश में 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। इस विशेष अवसर पर लोग अपने अपने तरीके से बापू को याद कर रहे हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। उज्जैन के रहने वाले रवि अकोदिया के परिवार ने इस बार महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए रंगों का नहीं, बल्कि अनाज का सहारा लिया है। परिवार के सदस्यों ने बेहद मेहनत से अनाज के माध्यम से बापू की एक शानदार और आकर्षक तस्वीर तैयार की है। यह कलाकृति न केवल देखने में अद्भुत है, बल्कि इसके पीछे छिपा संदेश भी काफी गहरा है।
सालों से जारी है अनोखी परंपरा
रवि अकोदिया का परिवार पिछले 15 वर्षों से लगातार महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें अलग-अलग रचनात्मक माध्यमों से श्रद्धांजलि देता आ रहा है। वे अब तक कैनवास, ड्राइंग और पेंटिंग के विभिन्न रूपों के जरिए बापू के प्रति अपना सम्मान प्रकट कर चुके हैं। रवि का मानना है कि बापू का जो आचरण था, वही उनका वास्तविक जीवन था और आज की पीढ़ी को उसी राह पर चलने की आवश्यकता है। रवि खुद भी अपने जीवन में गांधीजी के आदर्शों को उतारने का प्रयास करते हैं और उनका पूरा परिवार इस नेक कार्य में उनका कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता है।
6 प्रकार के अनाज से तैयार हुई पेंटिंग
इस बार की कलाकृति के बारे में विस्तार से बताते हुए रवि ने कहा कि इसे तैयार करने में उन्हें कुल 6 घंटे का समय लगा। इस पेंटिंग की खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के सिंथेटिक रंग का उपयोग नहीं किया गया है। इसके बजाय, उन्होंने 6 प्रकार की दाल, चावल, मेथी दाने और अन्य खाद्यान्न सामग्रियों का इस्तेमाल करके बापू की आकृति को उकेरा है। जब कोई इस पेंटिंग को गौर से देखता है, तो उसे अनाज के दानों के जरिए बनाई गई बारीकियां नजर आती हैं, जो इसे एक अनूठा रूप देती हैं।
अनाज बचाने का दिया संदेश
इस कलाकृति के माध्यम से रवि ने मालवा अंचल की एक बड़ी चिंता की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मालवा प्रांत में मानसून की बारिश उम्मीद से काफी कम रही है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में किसानों की फसलों और अनाज की पैदावार पर पड़ेगा। इस कठिन स्थिति को देखते हुए रवि ने आम जनता से अपील की है कि वे अनाज को कभी भी व्यर्थ न जाने दें। अनाज का सही उपयोग करना ही इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह 16वां साल है जब रवि कोई विशेष संदेश देते हुए बापू को याद कर रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने बालू रेत से बापू की आकृति बनाकर श्रद्धांजलि दी थी।
युवा पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास
परिवार की सदस्य रिद्धिमा ने बताया कि उनके चाचा रवि हमेशा देशभक्ति और महान हस्तियों के जीवन से जुड़ी बातें साझा करते हैं। रिद्धिमा ने कहा, 'शुरुआत में मुझे ये बातें पूरी तरह समझ नहीं आती थीं, लेकिन अब मैं महात्मा गांधी के योगदान और उनके महत्व को भली-भांति समझती हूं।' रिद्धिमा खुद भी पहले कैनवास पर पेंटिंग बनाती थीं, लेकिन इस बार अनाज से पेंटिंग बनाने के इस अनोखे प्रयोग में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परिवार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि वे किस प्रकार गांधीजी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश को आधुनिक पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। उज्जैन शहर में गांधी जयंती पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन अनाज से बनी बापू की यह तस्वीर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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