धौलपुर की संतर रोड का अनसुना इतिहास: सेंट्रल रोड से कैसे बनी शहर की सबसे व्यस्त बाजार? राजस्थान 2 घंटे पहले 5
राजस्थान के धौलपुर में स्थित संतर रोड आज के दौर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र तो है ही, लेकिन इसकी नींव रियासतकाल की ऐतिहासिक विरासतों में छिपी है।

इतिहास और व्यापार का संगम

राजस्थान के धौलपुर शहर की संतर रोड केवल खरीदारी के लिए मशहूर एक आम बाजार नहीं है, बल्कि यह अपने दामन में पूरे रियासतकाल की यादें सहेजे हुए है। आज यह इलाका शहर का सबसे बड़ा और भीड़भाड़ वाला बाजार बन चुका है, जहां आम लोगों की हर जरूरत का सामान उपलब्ध है। हालांकि, आधुनिक शोर और चमक-धमक के बीच भी इस सड़क पर ऐसी कई निशानियां मौजूद हैं, जो हमें धौलपुर के सुनहरे अतीत की याद दिलाती हैं।

सेंट्रल रोड से संतर रोड तक का सफर

स्थानीय इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, रियासतकाल के दौरान इस सड़क को सेंट्रल रोड के नाम से पुकारा जाता था। इसका यह नाम रखने के पीछे एक ठोस वजह थी, क्योंकि यह सड़क धौलपुर रियासत के प्रशासनिक संचालन का मुख्य केंद्र हुआ करती थी। इस क्षेत्र के आसपास ही महल बने हुए थे, जहां से पूरे राज्य का कामकाज देखा जाता था। जानकारों का कहना है कि 1836 से लेकर 1873 तक महाराजा भगवंत सिंह के शासनकाल में यह क्षेत्र रियासत के सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय केंद्रों में गिना जाता था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, बोलचाल की भाषा में 'सेंट्रल रोड' शब्द का उच्चारण बदल गया और आम लोगों के बीच यह सड़क 'संतर रोड' के नाम से जानी जाने लगी।

धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र की विरासत

संतर रोड की पहचान केवल एक व्यापारिक केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। इसी मार्ग पर धौलपुर के महाराजाओं के इष्ट देव, भगवान नरसिंह देव का भव्य मंदिर स्थित है। इसके अलावा, यहाँ नरसिंह बाग और रियासतकालीन महलों की उपस्थिति आज भी उस दौर की भव्यता को दर्शाती है।

साल 1892 से जब महाराज राना निहाल सिंह का शासन था, तब इस सड़क पर ऐतिहासिक शरद महोत्सव का आयोजन किया जाता था। उस दौरान यह सड़क एक विशाल मेले का केंद्र होती थी। दिवाली तक चलने वाले इस उत्सव में दूर-दराज के इलाकों से लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे, जिससे यह मार्ग व्यापार और खरीददारी का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता था।

स्थापत्य कला और ऐतिहासिक प्रतीक

संतर रोड की खूबसूरती आज भी इसके अनूठे निर्माण में दिखाई देती है। यहां की दुकानों और रास्तों के आसपास आज भी लाल और सफेद बलुआ पत्थरों से बने बड़े-बड़े दरवाजे देखे जा सकते हैं। ये दरवाजे धौलपुर की प्रसिद्ध पत्थर कला और प्राचीन वास्तुकला के बेजोड़ उदाहरण हैं। सड़क पर स्थित ऐतिहासिक हनुहंकार तोप भी रियासत के गौरवशाली सैन्य इतिहास और शौर्य की कहानी को आज भी जीवंत रखे हुए है।

आज के दौर में भले ही बाजार का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन संतर रोड का महत्व कम नहीं हुआ है। यह सड़क आज भी धौलपुर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। रोजाना हजारों की संख्या में ग्राहक यहां खरीदारी के लिए आते हैं। संतर रोड एक तरफ आधुनिक धौलपुर की व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊंचाइयां दे रही है, तो दूसरी तरफ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के जरिए शहर के गौरवपूर्ण अतीत की गाथा भी सुना रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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