खान फार्म विवाद: प्रियंका गांधी की ननद सायरा वाड्रा के समर्थन में उतरे कांग्रेसी, जानिए क्या है 4 एकड़ जमीन का पूरा मामला उत्तराखंड 2 महीने पहले 73
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में 4 एकड़ की कीमती जमीन के मालिकाना हक को लेकर प्रियंका गांधी की ननद सायरा वाड्रा और एक बुजुर्ग महिला आमने-सामने हैं, जिसके बाद वहां भारी राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है।

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले से एक बेहद गरमाया हुआ मामला सामने आया है, जिसने सूबे की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। किच्छा के पिपलिया मोड़ पर स्थित एक बहुचर्चित 4 एकड़ के 'खान फार्म' पर कब्जे को लेकर विवाद इस कदर बढ़ गया है कि वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। इस पूरे विवाद के केंद्र में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी की ननद सायरा वाड्रा हैं, जिनके समर्थन में अब स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुई जंग अब एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुकी है।

आखिर क्या है खान फार्म का पूरा विवाद?

पिपलिया मोड़ पर स्थित खान फार्म के मालिकाना हक और कब्जे को लेकर चल रहा यह विवाद तब चर्चा में आया जब सायरा वाड्रा और नसरीन सांगा नाम की महिला के बीच जमीन के आधिपत्य को लेकर सीधी तकरार शुरू हो गई। सायरा वाड्रा का आरोप है कि नसरीन सांगा ने इस फार्म हाउस पर अवैध रूप से जबरन कब्जा जमा रखा है। मामला उस समय और अधिक गरमा गया जब स्थानीय कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ अपने समर्थकों के साथ फार्म के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेसियों की मांग है कि इस जमीन का कब्जा तुरंत सायरा वाड्रा को दिलाया जाए। वहीं दूसरी तरफ, नसरीन फार्म हाउस के अंदर मौजूद हैं और बाहर कांग्रेसी प्रदर्शन कर रहे हैं। हालात को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। कांग्रेस विधायक ने तो यहां तक चेतावनी दे डाली है कि यदि सायरा वाड्रा को न्याय नहीं मिला, तो वे आत्मदाह कर लेंगे।

सायरा वाड्रा का क्या है दावा?

इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए सायरा वाड्रा ने कहा है कि इस जमीन को लेकर विरोधी पक्ष द्वारा बेवजह का विवाद खड़ा किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह 4 एकड़ का फार्म हाउस असल में उनकी बुआ कुलसुम खान का था। चूंकि कुलसुम खान ने शादी नहीं की थी और उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी, इसलिए बचपन से ही सायरा और उनके चचेरे भाई सिकंदर आलम खान ने उनकी देखभाल की थी। सायरा का दावा है कि कुलसुम खान ने साल 2024 में एक वसीयत तैयार की थी, जिसके तहत उन्होंने इस पूरे फार्म हाउस को सायरा वाड्रा और सिकंदर आलम खान के नाम कर दिया था। सायरा का आरोप है कि कुलसुम खान के निधन के बाद, उनकी बहन नसरीन सांगा, जिन्हें पहले कभी वहां नहीं देखा गया था, अचानक सक्रिय हो गईं। सायरा के अनुसार, नसरीन 19 दिसंबर को कुछ भूमाफिया और संदिग्ध तत्वों के साथ जबरन फार्म हाउस के अंदर घुस गईं और उस पर अवैध कब्जा कर लिया।

नसरीन सांगा का वीडियो बयान और उनका पक्ष

दूसरी ओर, फार्म हाउस के भीतर मौजूद नसरीन सांगा ने एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष जनता के सामने रखा है और सायरा वाड्रा के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। नसरीन का कहना है कि कुलसुम खान उनकी सगी बहन थीं। उनका परिवार साल 1939 से इस जमीन पर रह रहा है। अपने माता-पिता और अन्य भाई-बहनों के गुजर जाने के बाद, वे अपने परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य बची हैं और इस नाते वे ही इस संपत्ति की स्वाभाविक और कानूनी उत्तराधिकारी हैं। नसरीन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग साजिश के तहत फार्म के मुख्य गेट पर धरना दे रहे हैं और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनकी और उनके परिवार की जान को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

भाजपा का कांग्रेस पर प्रहार और प्रियंका गांधी से सवाल

इस पारिवारिक और कानूनी विवाद में अब भारतीय जनता पार्टी भी कूद पड़ी है और उसने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी सत्ता और प्रभाव का दुरुपयोग कर इस कीमती जमीन को हड़पने का प्रयास कर रही है। भाजपा का कहना है कि स्थानीय कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ अपने साथ करीब 100 लोग लेकर वहां पहुंचे और एक 90 साल की बुजुर्ग महिला नसरीन खान को डराने और धमकाने का काम कर रहे हैं। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि कांग्रेस विधायक केवल सायरा वाड्रा के कहने पर इतनी बड़ी भीड़ लेकर वहां नहीं पहुंच सकते, जरूर इसके पीछे किसी बड़े नेता का इशारा है। भाजपा ने मांग की है कि इस पूरे मामले पर प्रियंका गांधी को सामने आकर जवाब देना चाहिए कि एक बुजुर्ग महिला की जमीन पर कब्जे के प्रयास में उनकी पार्टी के नेता क्यों शामिल हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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