राजस्थान
एक घंटा पहले
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हादसे में गंवा दिया था अपना अगला बायां पैर
राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित घोड़ाघाटी गांव की एक गौशाला में रहने वाली गाय बीते करीब एक साल से बेहद मुश्किल स्थिति में थी। हाईवे पर हुए एक दर्दनाक हादसे में इस गाय ने अपना अगला बायां पैर गंवा दिया था। इस दुर्घटना के बाद से ही बेजुबान गाय केवल 3 पैरों के सहारे ही चलने-फिरने को मजबूर बनी हुई थी।
पुजारी के प्रयास से नारायण सेवा संस्थान ने दिया सहारा
गाय की इस पीड़ा और लाचारी को देखकर वहां के मंदिर के पुजारी शंकर सिंह शक्तावत का दिल पसीज गया। उन्होंने इस बेजुबान को राहत दिलाने के लिए उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान से संपर्क किया। पुजारी की बात सुनकर संस्थान ने गाय के उपचार और उसे नया जीवन देने के लिए तुरंत कदम उठाया।
कार्बन फाइबर तकनीक से महज चार दिन में बना पैर
नारायण सेवा संस्थान ने अपने इतिहास में पहली बार किसी गाय के लिए प्रोस्थेटिक पैर तैयार करने का काम शुरू किया। संस्थान के विशेषज्ञों ने कार्बन फाइबर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए महज चार दिन की अल्पावधि में गाय के लिए एक कृत्रिम पैर बनाकर तैयार कर दिया।
एक लाख रुपये की कीमत का पैर लगाया गया पूरी तरह नि:शुल्क
बाजार में इस तरह के आधुनिक कृत्रिम पैर की अनुमानित कीमत करीब एक लाख रुपये होती है। हालांकि, संस्थान ने इस गाय के लिए यह पूरा काम पूरी तरह नि:शुल्क किया। नया पैर लगाए जाने के बाद अब यह गाय एक बार फिर अपने चारों पैरों के सहारे खड़ी हो सकी है और आसानी से चलने-फिरने लगी है।
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