उदयपुर की 200 साल पुरानी दुकान जहां 'हरि ॐ' के बिना नहीं मिलती मिठाई, स्वाद में लाजवाब है 'गुलाब पासा' राजस्थान 2 महीने पहले 70
उदयपुर के जगदीश चौक पर स्थित हरिओम मिष्ठान अपनी अनूठी परंपरा और खास मिठाई 'गुलाब पासा' के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

उदयपुर के जगदीश चौक की ऐतिहासिक पहचान

राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर अपनी खूबसूरती के साथ-साथ अपने लाजवाब खान-पान के लिए भी दुनिया भर में जानी जाती है। शहर के जगदीश चौक में स्थित करीब 200 साल पुरानी एक मिठाई की दुकान आज भी अपनी सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा को जीवित रखे हुए है। इस दुकान का नाम हरिओम मिष्ठान है, जो न केवल अपने अनोखे स्वाद बल्कि अपनी अनूठी मेहमाननवाजी के लिए भी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

'हरि ॐ' के अभिवादन से होती है शुरुआत

इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आने वाले हर ग्राहक का स्वागत सबसे पहले मिठाई से नहीं, बल्कि एक बेहद पवित्र शब्द से होता है। दुकान पर कदम रखते ही कर्मचारियों और संचालकों द्वारा ग्राहकों का स्वागत 'हरि ॐ' बोलकर किया जाता है। इसी आदरपूर्ण अभिवादन के बाद ही ग्राहकों को उनकी पसंदीदा मिठाई परोसी जाती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस विरासत ने दुकान को शहर की सांस्कृतिक पहचान बना दिया है।

सिर्फ यहाँ मिलती है खास 'गुलाब पासा' मिठाई

हरिओम मिष्ठान की एक और बड़ी विशेषता उनकी खास मिठाई है, जिसे 'गुलाब पासा' के नाम से जाना जाता है। इस स्वादिष्ट और पारंपरिक मिठाई को बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है:

  • दूध की मलाईदार बनावट
  • ताजे और खुशबूदार गुलाब के तत्व
  • स्वाद अनुसार उत्तम गुणवत्ता की शक्कर

यह लाजवाब और अनोखी मिठाई पूरे उदयपुर शहर में सिर्फ इसी दुकान पर तैयार की जाती है। इस विरासत और स्वाद का अनुभव लेने के लिए देश-विदेश से सैलानी यहाँ खिंचे चले आते हैं। इस अनोखी परंपरा और बेजोड़ स्वाद ने इस दुकान को उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर का एक अभिन्न हिस्सा बना दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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