38 साल पहले अस्पताल में बदल गए थे दो बच्चे, DNA टेस्ट से खुला खौफनाक राज तो अस्पताल पर ठोंका मुकदमा विश्व एक महीने पहले 38
अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां जन्म के 38 साल बाद पता चला कि दो बच्चे अस्पताल में आपस में बदल दिए गए थे। अब दोनों व्यक्तियों ने अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

जन्म के समय हुई अदला-बदली का खुलासा

अमेरिका से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। लगभग 38 साल पहले अस्पताल में पैदा हुए दो बच्चे आपस में बदल दिए गए थे, जिसका पता दशकों बाद चला है। अब जब इस बात की पुष्टि DNA टेस्ट के जरिए हो गई है, तो इन दोनों व्यक्तियों ने अस्पताल प्रशासन पर मुकदमा दर्ज करा दिया है। नॉर्थ डकोटा स्थित एक अस्पताल पर यह गंभीर आरोप लगा है कि उनकी लापरवाही की वजह से इन दोनों लोगों को वह जिंदगी नहीं मिल सकी, जो वास्तव में उनकी थी। पीड़ितों का कहना है कि अस्पताल की एक भूल ने उनसे उनके असली माता-पिता और परिवार का साथ छीन लिया।

DNA रिपोर्ट से सामने आई सच्चाई

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब काइल बाइलिन ने क्रिसमस के मौके पर घर पर ही किए जाने वाले एक सामान्य DNA टेस्ट को करने का फैसला लिया। इस टेस्ट के जरिए उन्हें एक वंशावली वेबसाइट पर अपनी असली बुआ के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद मामला आगे बढ़ा और जेरेमी मॉरिसन ने भी अपना DNA टेस्ट करवाया। जब दोनों की रिपोर्ट्स आईं, तो नतीजे चौंकाने वाले थे। DNA टेस्ट ने यह साबित कर दिया कि दोनों बच्चों को जन्म के समय ही अस्पताल द्वारा गलत परिवार को सौंप दिया गया था।

टेस्ट के नतीजे देखकर मैं पूरी तरह हैरान था। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे जन्म के वक्त अस्पताल में किसी दूसरे बच्चे के साथ मेरी अदला-बदली कर दी गई थी: काइल बाइलिन

शक्ल-सूरत से हुई पुष्टि

जेरेमी मॉरिसन के मुताबिक, उन्हें तब और भी ज्यादा यकीन हो गया जब उन्होंने काइल बाइलिन के भाई की तस्वीरें देखीं। उन्होंने गौर किया कि उनकी शक्ल-सूरत काइल के भाई से काफी हद तक मिलती है। अदालत में दाखिल किए गए दस्तावेजों के अनुसार, इन दोनों का जन्म 26 जनवरी, 1988 को नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर में हुआ था। उसी दिन वे दोनों गलत परिवारों के साथ अपने घर भेज दिए गए थे।

अस्पताल का रुख और साक्ष्यों की कमी

हालांकि, इस मामले में यूनिटी मेडिकल सेंटर का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह साबित कर सके कि बच्चों की अदला-बदली में उनके स्टाफ की कोई गलती थी। अस्पताल ने अपने बयान में कहा है कि वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उस समय हुआ क्या था। दूसरी तरफ, काइल बाइलिन का दावा है कि उनके पास आज भी अस्पताल का वह ब्रेसलेट मौजूद है, जिसमें उन्हें गलती से दूसरे नाम से दर्ज किया गया था। इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अस्पताल के रिकॉर्ड अब मौजूद नहीं हैं, जिससे जांच में मुश्किल आ रही है।

मजबूर माता-पिता और बीता हुआ वक्त

इस पूरी घटना ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। एवलिन न्यूटन, जिन्होंने काइल को अपना बेटा मानकर पाला है, ने भावुक होते हुए कहा कि काइल हमेशा उनका बेटा रहेगा और यह भावना कभी नहीं बदलेगी। हालांकि, उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात का गहरा मलाल है कि वे उस जिंदगी को वापस नहीं पा सकतीं, जो उन्हें अपने जैविक बेटे के साथ बितानी चाहिए थी। अस्पताल में ऐसी लापरवाही के मामले पहले भी दुनिया के अलग-अलग कोनों से सामने आते रहे हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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