महाराष्ट्र
एक घंटा पहले
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मराठवाड़ा की उपेक्षा के खिलाफ सड़कों पर शिवसेना
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में अधूरे विकास कार्यों और सरकारी वादों को लेकर सियासी पारा गर्म हो गया है। शनिवार को हिंगोली में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस सरकार के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस आंदोलन को तुमसे ना हो पाएगा शीर्षक दिया गया है। यह तंज भरा नाम मशहूर हिंदी फिल्म के संवाद से प्रेरित है, जिसका उपयोग किसी की कार्यक्षमता पर सवाल उठाने या उन्हें काम करने में असमर्थ बताने के लिए किया जाता है। प्रदर्शन का नेतृत्व विधान परिषद सदस्य और विधान परिषद में विपक्ष के नेता रह चुके अंबादास दानवे ने किया।
आंदोलन के पीछे की बड़ी वजह
शिवसेना का यह प्रदर्शन राज्य की महायुति सरकार को घेरने की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसे 17 सितंबर को आने वाले मराठवाड़ा मुक्ति दिवस की वर्षगांठ से पहले शुरू किया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 1948 में इसी दिन मराठवाड़ा क्षेत्र को हैदराबाद के निजाम के अत्याचारों और शासन से आजादी मिली थी। प्रदर्शन के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए अंबादास दानवे ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जनता से विकास के कुल 780 वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि इन वादों का 1.5 प्रतिशत हिस्सा भी पूरा नहीं किया गया है।
सरकार पर भेदभाव के गंभीर आरोप
अंबादास दानवे ने सरकार पर मराठवाड़ा के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि इस क्षेत्र को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने चिंता जताते हुए दावा किया कि राज्य में सबसे अधिक किसान आत्महत्याएं इसी क्षेत्र में हो रही हैं, जो सरकार की विफलता को दर्शाता है। दानवे ने याद दिलाया कि आजादी के बाद मराठवाड़ा बिना किसी शर्त के महाराष्ट्र का हिस्सा बना था, फिर भी इसे निरंतर अन्याय और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। अपनी मांगों को लेकर उन्होंने रेजिडेंट कलेक्टर प्रतीक्षा भुते को एक आधिकारिक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन के समापन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जन आंदोलन 17 सितंबर को छत्रपति संभाजीनगर में उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में पूरा होगा।
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