पश्चिम बंगाल
एक घंटा पहले
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तृणमूल कांग्रेस के नेता और फालता से पार्टी के उम्मीदवार रहे जहांगीर खान को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राज्य पुलिस की एसटीएफ ने उन्हें आज सुबह नेपाल सीमा से सटे इलाके से हिरासत में लिया। लंबे समय से फरार चल रहे जहांगीर पर शिकंजा कसने में पुलिस को कई दिन की मशक्कत करनी पड़ी।
लंबे समय से फरार था आरोपी नेता
बंगाल के चुनावी नतीजे सामने आने के बाद से ही जहांगीर भूमिगत हो गया था और लगातार उसकी तलाश की जा रही थी। आखिरकार आज एसटीएफ की टीम ने उसे धर दबोचा। चुनाव से पहले एसआईआर के दौरान ही जहांगीर खान पर कई गंभीर आरोप लगे थे। उन पर बीएलओ पर दबाव बनाने और मतदाता सूची में मृत लोगों के नाम जुड़वाने का आरोप लगा था।
लोगों को धमकाने के भी आरोप
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। इसके बाद चुनाव से पहले इलाके में लोगों को धमकाने के आरोप भी सामने आए। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक बनाकर डुंडी पुलिस स्टेशन भेजा था।
ईवीएम पर टेप चिपकाने का आरोप
फालता विधानसभा चुनाव की वोटिंग के दौरान क्षेत्र में कई धांधलियां उजागर हुई थीं। मतदान के बीच ही कई ईवीएम पर सेलोटेप चिपका दी गई थी और इसका आरोप जहांगीर पर लगा था। इसी के बाद चुनाव आयोग ने फालता में दोबारा चुनाव कराने की घोषणा की थी।
हार के बाद से गायब था जहांगीर
बंगाल में 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से 21 मई तक जहांगीर पूरी तरह 'गायब' हो चुका था। उसने चुनाव से ठीक दो दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था और उसके बाद से ही वह फरार चल रहा था।
नेपाल के रास्ते विदेश भागने की योजना
जहांगीर खान ने अदालत से सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन राज्य की ओर से भी उस सुरक्षा को वापस लेने के लिए आवेदन दिया गया था। इन तमाम उठापटक के बीच जहांगीर खान ने नेपाल के रास्ते विदेश भाग निकलने की योजना बनाई थी, लेकिन वह इस कोशिश में नाकाम रहा।
अन्य टीएमसी नेताओं पर भी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से कई तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारियां हो रही हैं। पुलिस की टीम टीएमसी नेताओं पर लगे आरोपों की जांच कर उन्हें हिरासत में ले रही है। इस बीच कई टीएमसी नेता पार्टी से इस्तीफा भी दे चुके हैं।
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