चिड़ियाघर को कहें अलविदा, माउंट आबू की इन 6 जगहों पर मिलता है असली जंगल सफारी का रोमांच जीवनशैली एक घंटा पहले 2
राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू में प्राकृतिक आवास में वन्यजीवों को निहारने के कई शानदार विकल्प मौजूद हैं, जहां तेंदुए, भालू और लंगूर खुलेआम घूमते दिखते हैं। टाइगर पाथ से लेकर ट्रेवर टैंक तक ये 6 जगहें रोमांच के शौकीनों को जरूर देखनी चाहिए।

अगर प्रकृति और रोमांच आपको लुभाते हैं, तो राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की सैर आपके लिए किसी तोहफे से कम नहीं। यहां पिंजरों में बंद जानवरों की जगह उन्हें उनके स्वाभाविक परिवेश में देखने का मौका मिलता है। तेंदुए, स्लॉथ बेयर (भालू), मगरमच्छ और ग्रे लंगूर जैसे जीव यहां खुलेआम विचरण करते नजर आते हैं। आइए जानते हैं वे 6 जगहें, जहां जंगल सफारी जैसा अनुभव मिलता है।

टाइगर पाथ: 8 किलोमीटर लंबी रोमांचक ट्रेकिंग

माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी का सबसे लंबा नेचुरल ट्रेल 'टाइगर पाथ' के नाम से जाना जाता है। करीब 8 किलोमीटर लंबा यह रास्ता आपको प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है, जहां स्लॉथ बेयर, लेपर्ड समेत कई वन्यजीव अक्सर दिखाई देते हैं। चूंकि यह एक संरक्षित वन्यजीव जोन है, इसलिए सुरक्षा और नियमों के मद्देनजर यहां वन विभाग की अनुमति और एक प्रशिक्षित गाइड का साथ होना अनिवार्य है।

सनसेट पॉइंट: डूबते सूरज के साथ वन्यजीवों का दीदार

घने वन्यजीव क्षेत्र में बसा सनसेट पॉइंट एक बेहतरीन व्यू पॉइंट है। यहां ढलते सूरज के अद्भुत नजारों के साथ-साथ प्राकृतिक आवास में जानवरों को देखने का मौका भी मिलता है। शाम के समय ग्रे लंगूर और स्लॉथ बेयर जैसे कई पशु-पक्षी अपने स्वाभाविक परिवेश में घूमते देखे जा सकते हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए वन विभाग द्वारा निर्धारित टिकट लेना जरूरी है।

अधर देवी मंदिर: सीढ़ियों पर भालू का गुजरना आम बात

प्रसिद्ध शक्ति पीठ अधर देवी मंदिर वन क्षेत्र के बेहद नजदीक स्थित है। यही वजह है कि मंदिर के प्रवेश द्वार और सीढ़ियों पर अक्सर वन्यजीवों का आवागमन देखा जा सकता है। यहां सीढ़ियों पर भालू का गुजरना और ग्रे लंगूरों का दिखना सामान्य बात है। खास बात यह है कि ये वन्यजीव दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते और शांति से अपना रास्ता तय कर लेते हैं।

नक्की लेक से सनसेट पॉइंट तक का 2.5 किलोमीटर ट्रेल

नक्की लेक से सनसेट पॉइंट तक जाने वाला 2.5 किलोमीटर लंबा नेचुरल ट्रेल जंगल ट्रेकिंग के लिए शानदार जगह है। इस रास्ते पर पैदल चलते हुए आप घने जंगलों से होकर गुजरते हैं, जहां कई तरह के जंगली जानवर और पक्षी अपने प्राकृतिक आवास में दिख जाते हैं। नक्की लेक से शुरू होकर सीधे सनसेट पॉइंट तक पहुंचने वाला यह मार्ग प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों की पसंदीदा पसंद है।

सालगांव तालाब: वन्यजीवों की प्यास बुझाता मुख्य जलस्रोत

माउंट आबू से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सालगांव तक का रास्ता घने वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, जो पैदल यात्रा के लिए बेहतरीन विकल्प है। सालगांव तालाब वन्यजीवों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत है, जहां अक्सर अलग-अलग प्रजातियों के जानवर प्यास बुझाते दिखते हैं। तालाब के पास बने वॉच टावर तक पैदल पहुंचकर आप जंगल ट्रेकिंग के रोमांच और प्राकृतिक नजारों का भरपूर आनंद ले सकते हैं।

ट्रेवर टैंक: अंग्रेजों के जमाने का ऐतिहासिक तालाब

माउंट आबू के वाइल्डलाइफ एरिया में बना यह मानव-निर्मित तालाब अंग्रेजों के समय का है और एक अंग्रेज अधिकारी के नाम पर इसे 'ट्रेवर टैंक' के रूप में पहचाना जाता है। यहां मगरमच्छ, रंग-बिरंगी मछलियां, ग्रे लंगूर और स्लॉथ बेयर समेत कई वन्यजीव आसानी से देखे जा सकते हैं। इस पूरे इलाके में घूमने के लिए वन विभाग से निर्धारित टिकट लेना अनिवार्य है। तालाब के किनारे पहाड़ियों पर बने व्यू पॉइंट्स से बेहद खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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