जीवनशैली
6 घंटे पहले
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विचारों
भीड़भाड़ से दूर पहाड़ों में सुकून की नई तलाश
जब भी पहाड़ों पर घूमने की बात आती है, तो उत्तराखंड का नैनीताल सबसे पहले दिमाग में आता है। लेकिन आज के समय में नैनीताल की प्रसिद्ध नैनी झील, व्यस्त माल रोड और सैलानियों की भारी भीड़ कई बार वह सुकून नहीं दे पाती जिसकी तलाश में लोग पहाड़ों का रुख करते हैं। अगर आप भी इस बार कुछ अलग और बेहद शांत अनुभव चाहते हैं, तो आपको नैनीताल जिले के ही एक छिपे हुए खूबसूरत कोने की सैर करनी चाहिए। हम बात कर रहे हैं हरीशताल की, जो अपनी बेपनाह प्राकृतिक सुंदरता और जादुई वातावरण के लिए जाना जाता है।
नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में स्थित हरीशताल एक ऐसी जगह है जहां की प्राकृतिक खूबसूरती को देखकर आपका मन खुश हो जाएगा। यहाँ का शांत वातावरण, हरी-भरी वादियाँ, चारों तरफ घने जंगल और बादलों का खेल पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। यह इलाका शहरी कोलाहल से कोसों दूर है, जहाँ पहुँचकर आप प्रकृति के बेहद करीब महसूस कर सकते हैं।
हरीशताल का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण
हरीशताल चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ की विशाल और शांत झील है। इस झील का पानी इतना शांत है कि इसमें आसपास के पहाड़ों की परछाई साफ देखी जा सकती है। मानसून के मौसम में इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। जब पहाड़ों पर बादलों का डेरा होता है और चारों तरफ धुंध छा जाती है, तो हरीशताल का नजारा किसी सपने जैसा लगने लगता है। जो लोग प्रकृति प्रेमी हैं और जिन्हें फोटोग्राफी का शौक है, उनके लिए यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है। यहाँ की ताजी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट मन को शांति प्रदान करती है।
लोहाखाम ताल: पास में ही मौजूद है दिल के आकार की अनोखी झील
हरीशताल की यात्रा केवल एक झील तक सीमित नहीं है। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए एक और बड़ा आकर्षण बेहद करीब ही मौजूद है, जिसे लोहाखाम ताल के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस झील की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा आकार है। यह झील पूरी तरह से दिल के आकार में बनी हुई है। एक ही यात्रा के दौरान दो बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक झीलों का दीदार करना सैलानियों के लिए एक बेहद सुखद और अनोखा अनुभव होता है। लोहाखाम ताल के आसपास का जंगली इलाका और शांत वातावरण भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।
कैसे पहुंचें हरीशताल? जानिए सफर का पूरा रास्ता
हरीशताल पहुँचने के लिए पर्यटकों को हल्द्वानी से पहाड़ी रास्तों का सफर तय करना पड़ता है। यह खूबसूरत जगह उत्तराखंड के मैदानी शहर हल्द्वानी से लगभग 75 किलोमीटर और रेलवे स्टेशन वाले शहर काठगोदाम से तकरीबन 69 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ जाने के लिए आपको हल्द्वानी से हैड़ाखान मार्ग की ओर रुख करना होगा। इस सफर के दौरान आपको पहाड़ों के टेढ़े-मेढ़े और खूबसूरत रास्तों से गुजरना होगा, जहाँ रास्ते भर बदलते प्राकृतिक नजारे आपकी यात्रा को और भी रोमांचक बना देंगे। हालांकि, इस दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर सफर करने से पहले स्थानीय रास्तों की स्थिति और मौसम के मिजाज की जानकारी लेना बेहद जरूरी है, खासकर बारिश के मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।
मानसून में दुगुनी हो जाती है यहाँ की खूबसूरती
बारिश के मौसम में हरीशताल और इसके आसपास का पूरा क्षेत्र जीवंत हो उठता है। मानसून की फुहारें पड़ते ही सूखी घास और पेड़-पौधों में गजब की हरियाली छा जाती है। जंगलों के बीच से होकर गुजरते बादलों के टुकड़े और पहाड़ों को ढकती धुंध एक ऐसा जादुई माहौल तैयार करती है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बारिश के बाद झील का जलस्तर भी बढ़ जाता है, जिससे इसका स्वरूप और भी निखर जाता है। सोशल मीडिया के लिए वीडियो और रील बनाने वाले युवाओं के लिए यह जगह एक बेहतरीन लोकेशन साबित हो सकती है, जहाँ हर फ्रेम में कुदरत का एक नया रंग देखने को मिलता है।
शांति, सुकून और ट्रैकिंग का अद्भुत संगम
यह जगह उन लोगों के लिए सबसे बेहतरीन है जो एकांत पसंद करते हैं। नैनीताल जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की तुलना में हरीशताल में पर्यटकों का हुजूम बहुत कम रहता है, जिससे यहाँ की मूल शांति बनी रहती है। यहाँ आपको हर तरफ फैले हुए खेत, छोटे पहाड़ी घर, घने जंगल और पहाड़ियां दिखाई देंगी। इसके अलावा, रोमांच के शौकीन लोगों के लिए यहाँ के जंगली और पहाड़ी रास्ते ट्रैकिंग के लिए बेहतरीन विकल्प प्रदान करते हैं। यहाँ आकर आप पहाड़ी जीवन को बहुत करीब से देख और समझ सकते हैं, और यहाँ के स्थानीय लोगों की सादगी भरी जिंदगी को महसूस कर सकते हैं।
यात्रा पर निकलने से पहले इन जरूरी बातों का रखें खास ख्याल
चूँकि हरीशताल एक दूरदराज का पहाड़ी इलाका है, इसलिए यहाँ आपको नैनीताल जैसी आधुनिक और व्यावसायिक सुविधाएँ नहीं मिलेंगी। यहाँ बड़े और आलीशान होटल या बहुत अधिक संख्या में होमस्टे उपलब्ध नहीं हैं। यह एक पूरी तरह से प्राकृतिक और अनछुआ क्षेत्र है, इसलिए सैलानियों को यहाँ जाने से पहले अपनी तैयारी पूरी रखनी चाहिए। अपने साथ खाने-पीने का जरूरी सामान, पानी की बोतलें और आवश्यक दवाइयाँ अवश्य रखें। अपनी गाड़ी और ईंधन की व्यवस्था भी पहले से ही दुरुस्त करके चलें ताकि सफर के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। योजना बनाकर की गई यात्रा आपके इस अनुभव को और भी यादगार बना देगी।
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