दिल्ली से वैली ऑफ फ्लावर्स की पूरी यात्रा योजना: खर्च, ट्रेकिंग रूट और घूमने का सही समय जानें जीवनशैली एक घंटा पहले 2
मॉनसून में रंग-बिरंगे फूलों और हरी-भरी वादियों का अनुभव लेना चाहते हैं तो उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स बेहतरीन विकल्प है। दिल्ली से वहां तक पहुंचने का रास्ता, ट्रेकिंग, खर्च और जरूरी टिप्स यहां पढ़ें।

बारिश के मौसम में अगर आप ऐसी किसी जगह की तलाश में हैं जहां चारों ओर रंग-बिरंगे फूल, हरे-भरे पहाड़, झरने और बादलों से घिरी वादियां नजर आएं, तो उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स आपके लिए आदर्श मंजिल साबित हो सकती है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में दर्ज यह घाटी हर साल जून से अक्टूबर तक सैलानियों के लिए खुली रहती है। नीचे दिल्ली से यहां पहुंचने का रास्ता, ट्रेकिंग की जानकारी, अनुमानित खर्च और यात्रा से जुड़ी जरूरी बातें विस्तार से दी गई हैं।

मॉनसून में घूमने की शानदार जगह

बारिश शुरू होते ही इस घाटी में हजारों फूल एक साथ खिल उठते हैं और पूरा इलाका बेहद मनमोहक दिखने लगता है। यही कारण है कि देश और विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक इस प्राकृतिक दृश्य को निहारने यहां पहुंचते हैं। हरियाली, पहाड़ और खिले हुए फूलों का यह मेल मॉनसून यात्रा को यादगार बना देता है।

यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल घाटी

वैली ऑफ फ्लावर्स महज एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि दुनिया की खास प्राकृतिक धरोहरों में से एक है, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यह घाटी करीब 87 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इसकी जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता इसे दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग पहचान देती है। प्रकृति और पर्यावरण में रुचि रखने वालों के लिए यह किसी खुले प्राकृतिक संग्रहालय से कम नहीं है।

500 से ज्यादा दुर्लभ फूलों का घर

इस घाटी की सबसे बड़ी विशेषता यहां पाए जाने वाले फूल हैं। यहां 500 से अधिक दुर्लभ और हिमालयी फूलों की प्रजातियां मिलती हैं। बरसात में जब ये एक साथ खिलते हैं तो पूरा इलाका रंगों से भर उठता है। नीले, पीले, गुलाबी, लाल और बैंगनी रंग के फूल यहां देखने को मिलते हैं, जिनमें कई ऐसे हैं जो देश के अन्य हिस्सों में आसानी से नहीं मिलते। यही वजह है कि वनस्पति वैज्ञानिक भी अध्ययन के लिए यहां आते हैं।

पहला पड़ाव: दिल्ली से हरिद्वार या ऋषिकेश

दिल्ली से वैली ऑफ फ्लावर्स की यात्रा सबसे पहले हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचकर शुरू होती है। दिल्ली से हरिद्वार की दूरी लगभग 220 किलोमीटर है, जहां आप ट्रेन, वोल्वो बस, सामान्य बस या निजी कार से आसानी से पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग से यह सफर आमतौर पर 5 से 6 घंटे में पूरा हो जाता है। हरिद्वार और ऋषिकेश दोनों ही इस यात्रा के प्रमुख प्रवेश द्वार माने जाते हैं, जहां से आगे पहाड़ी सफर आरंभ होता है।

ऋषिकेश से जोशीमठ तक का यादगार रास्ता

ऋषिकेश से जोशीमठ तक करीब 250 किलोमीटर की पहाड़ी यात्रा करनी पड़ती है, जो बस या टैक्सी से लगभग 9 से 10 घंटे में पूरी होती है। रास्ते में देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसी खूबसूरत जगहें मिलती हैं, जहां अलकनंदा और भागीरथी जैसी नदियों का संगम देखने को मिलता है। पहाड़ों के बीच से गुजरता यह रास्ता अपने आप में एक शानदार अनुभव देता है।

गोविंदघाट से शुरू होता असली ट्रेक

जोशीमठ से आगे गोविंदघाट पहुंचने के बाद ट्रेकिंग शुरू होती है। यहां से करीब 13 किलोमीटर का ट्रेक तय कर घांघरिया पहुंचना होता है। रास्ते भर पहाड़, झरने और हरियाली आपका स्वागत करते रहते हैं। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह सफर खासा रोमांचक माना जाता है। वहीं जिन्हें पैदल चलने में दिक्कत होती है, उनके लिए कुछ जगहों पर खच्चर और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध रहती हैं।

घांघरिया में रुकने की अच्छी व्यवस्था

घांघरिया वैली ऑफ फ्लावर्स और हेमकुंड साहिब जाने वाले यात्रियों का मुख्य पड़ाव है। यहां कई होटल, लॉज और गेस्ट हाउस मौजूद हैं, जहां पर्यटक रात में आराम कर सकते हैं। ट्रेक पूरा करने के बाद अधिकतर लोग यहीं रुकते हैं और अगले दिन फूलों की घाटी देखने निकलते हैं। मौसम के अनुसार यहां पर्यटकों की भीड़ काफी बढ़ जाती है, इसलिए पीक सीजन में पहले से बुकिंग करा लेना बेहतर रहता है।

घांघरिया से फूलों की घाटी का खूबसूरत मार्ग

घांघरिया से वैली ऑफ फ्लावर्स की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है। यह ट्रेक बहुत कठिन नहीं माना जाता और रास्ते भर प्राकृतिक सुंदरता बिखरी रहती है। चारों ओर फैले फूल, छोटे-छोटे झरने, पहाड़ी पगडंडियां और बादलों से घिरी चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं, जहां लिया गया हर फोटो पोस्टकार्ड जैसा खूबसूरत दिखता है।

यात्रा का खर्च ज्यादा नहीं

बजट में घूमने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह यात्रा अच्छा विकल्प है। दिल्ली से हरिद्वार तक का खर्च लगभग 500 से 2,000 रुपये तक आ सकता है। वहीं 2 से 3 दिन के होटल और खाने-पीने पर करीब 3,000 से 6,000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। प्रवेश टिकट, स्थानीय यात्रा और अन्य खर्च मिलाकर कुल 500 से 1,500 रुपये अतिरिक्त लग सकते हैं। कुल मिलाकर यह ट्रिप काफी किफायती मानी जाती है।

यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

वैली ऑफ फ्लावर्स जाने से पहले मौसम की जानकारी जरूर ले लें, क्योंकि मॉनसून में यहां मौसम अचानक बदल सकता है। अपने साथ रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, ट्रेकिंग शूज, गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां रखें। पहाड़ी रास्तों पर आरामदायक जूते पहनना बेहद जरूरी होता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखें और प्लास्टिक या अन्य कचरा कहीं भी न फेंकें। साफ-सफाई बनाए रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है, ताकि इस खूबसूरत प्राकृतिक धरोहर की सुंदरता बरकरार रहे।

एक बार जरूर देखें यह अनोखा नजारा

वैली ऑफ फ्लावर्स प्रकृति की खूबसूरती का जीवंत उदाहरण है। यहां खिलने वाले सैकड़ों दुर्लभ फूल, हिमालय की मनमोहक वादियां, झरने और रोमांचक ट्रेकिंग का अनुभव यात्रा को यादगार बना देते हैं। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं और मॉनसून में किसी खास जगह घूमने की सोच रहे हैं, तो यह घाटी आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। सही तैयारी के साथ यह सफर जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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