मानसून की पहली सौगात! तय समय से पहले बहने लगा मेनाल झरना, 150 फीट गहरी घाटी में गिरती जलधारा देखने पहुंच रहे पर्यटक जीवनशैली एक घंटा पहले 3
भीलवाड़ा के बिजौलिया क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध मेनाल झरना तेज अंधड़ और बारिश के बाद इस बार जून के पहले सप्ताह में ही बहने लगा है। 150 फीट गहरी घाटी में गिरती जलधारा और चारों ओर फैली हरियाली देखने बड़ी संख्या में सैलानी उमड़ रहे हैं।

भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया क्षेत्र में मानसून की पहली आहट के साथ ही प्रकृति ने अपना मनोहारी रूप दिखाना शुरू कर दिया है। यहां का मशहूर पर्यटन स्थल मेनाल झरना एक बार फिर कल-कल बहती जलधारा के साथ जीवंत हो उठा है। हाल ही में आए तेज अंधड़ और बारिश के बाद झरने में पानी की आवक शुरू हुई, जिससे यह नजारा देखने के लिए पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। झरने की गूंजती धारा और चारों ओर बिखरी हरियाली लोगों को अपनी ओर खींच रही है।

तय वक्त से पहले बहा झरना, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह

खास बात यह है कि पिछले साल मेनाल झरना जून के मध्य में शुरू हुआ था, जबकि इस बार जून के पहले सप्ताह में ही इसकी धारा बहने लगी है। समय से पहले झरना शुरू होने से जहां स्थानीय लोग खुश हैं, वहीं पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में भी उत्साह का माहौल है। उनका मानना है कि इस बार पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

प्रकृति, इतिहास और आस्था का अनूठा संगम

अरावली की वादियों के बीच बसा मेनाल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। बिजौलिया से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थल प्रकृति, इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है। बारिश के बाद यहां का वातावरण और भी रमणीय हो जाता है। हरियाली से ढकी पहाड़ियां, ठंडी हवाएं और झरने की फुहारें पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव देती हैं।

150 फीट गहरी घाटी में गिरती जलधारा कर रही रोमांचित

मेनाल सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए भी जाना जाता है। यहां 12वीं और 13वीं शताब्दी के करीब 20 प्राचीन मंदिरों का समूह मौजूद है, जो भारतीय स्थापत्य कला की श्रेष्ठता को दर्शाता है। इन मंदिरों की नक्काशी और वास्तुकला पर्यटकों के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

करीब 150 फीट गहरी घाटी में गिरती झरने की जलधारा का दृश्य बेहद आकर्षक नजर आ रहा है। पानी की तेज आवाज और घाटी में गूंजती उसकी गर्जना माहौल को और रोमांचक बना रही है। प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर और घूमने-फिरने के शौकीन लोग इस खूबसूरत नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

पहली फुहारों के साथ ही कई गुना बढ़ जाता है सौंदर्य

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश की पहली फुहारों के साथ ही मेनाल का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। झरने के बहने से आसपास का पूरा इलाका जीवंत हो उठता है और पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो जाती है। यही वजह है कि मेनाल को राजस्थान के सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

बारिश की दस्तक के साथ मेनाल एक बार फिर गुलजार हो उठा है। बहता झरना, हरियाली से ढकी पहाड़ियां और ऐतिहासिक मंदिरों का यह अद्भुत संगम यहां आने वाले हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर रहा है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह नजारा और भी आकर्षक हो जाएगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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