राजस्थान
एक घंटा पहले
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राजस्थान के टोंक जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही इतनी भारी पड़ी कि एक बुजुर्ग की जान ही चली गई। पुलिस की इस कार्यशैली को लेकर अब तीखे सवाल उठ रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने की हड़बड़ी के बावजूद यातायात पुलिस ने उनकी बाइक रोक दी और नियम तोड़ने के मामले में कार्रवाई पर अड़ी रही। परिवार का दावा है कि इसी वजह से इलाज में देरी हुई, जिसका सीधा असर बुजुर्ग की जान पर पड़ा। दूसरी ओर संबंधित पुलिसकर्मी ने इन सभी आरोपों को नकारते हुए खुद को बेकसूर बताया है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच शुरू हो चुकी है।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में रोकी गई बाइक
पीपलू क्षेत्र के जावली गांव निवासी महेंद्र अपने पिता शिवजी लाल यादव को इलाज के लिए टोंक शहर ले जा रहे थे। परिवार के अनुसार शिवजी लाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी था। ऐसी स्थिति में महेंद्र एक परिचित की मदद से पिता को बाइक पर बैठाकर अस्पताल की ओर निकल पड़े, लेकिन रास्ते में ही ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें रोक लिया और चालान की औपचारिकता पूरी करने में एक घंटे से भी ज्यादा का समय लगा दिया।
घंटाघर चौराहे के पास हुई कार्रवाई
बताया जा रहा है कि घंटाघर चौराहे के पास यातायात पुलिस ने बाइक को रोका। बाइक पर तीन लोग सवार थे और चालक ने हेलमेट नहीं पहना था। इसी आधार पर पुलिस ने नियमों का हवाला देते हुए कार्रवाई शुरू कर दी।
महेंद्र का आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मी को बार-बार बताया कि उनके पिता की हालत नाजुक है और पहले उन्हें अस्पताल पहुंचने दिया जाए। उनका कहना है कि उन्होंने भरोसा दिलाया कि चालान की प्रक्रिया बाद में पूरी कर ली जाएगी, लेकिन उनकी एक न सुनी गई।
सड़क किनारे पेड़ के नीचे लिटाना पड़ा
परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने बाइक की चाबी भी अपने पास रख ली, जिससे वे आगे नहीं बढ़ पाए। इस बीच बुजुर्ग की हालत लगातार बिगड़ती रही। हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें कुछ देर के लिए सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे लिटाना पड़ा। परिवार का कहना है कि करीब एक घंटे बाद चालान की औपचारिकता पूरी होने पर ही उन्हें जाने दिया गया।
इसके बाद शिवजी लाल को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत आईसीयू में भर्ती कर लिया। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सपोर्ट समेत जरूरी इलाज दिया, मगर हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने इलाज में हुई देरी को मौत की मुख्य वजह बताते हुए पुलिस प्रशासन से शिकायत की है।
पुलिसकर्मी ने आरोपों को बताया तथ्यहीन
वहीं जिस यातायात पुलिसकर्मी पर आरोप लगे हैं, उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मौके पर बुजुर्ग की हालत इतनी गंभीर नहीं दिख रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि बाइक की चाबी छीनने जैसी बातें तथ्यहीन हैं और उन पर लगाए गए आरोप गलत हैं।
एसपी ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश
मामला तूल पकड़ने के बाद टोंक के एसपी रोशन मीणा ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। शिकायतकर्ता और पुलिसकर्मी, दोनों पक्षों के बयान लिए जाएंगे और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
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