नीचे टमाटर और ऊपर करेला: मुजफ्फरपुर के किसान की 'दो-तल्ला खेती' से 4 महीने में 5 लाख का शुद्ध मुनाफा बिहार 2 घंटे पहले 4
मुजफ्फरपुर के किसान राम इकबाल भगत ने एक ही खेत में नीचे टमाटर और ऊपर करेला उगाने वाला 'दो-तल्ला खेती' मॉडल अपनाया है, जिससे चार महीने में करीब पांच लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा है।

खेती में अपनाई जा रही नई तकनीक और नवाचार किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड स्थित गोविंदपुर गांव के किसान राम इकबाल भगत ने इसी दिशा में एक अनोखा प्रयोग कर मिसाल कायम की है। उन्होंने अपने खेत में 'दो-तल्ला खेती' का मॉडल अपनाया है, जिसमें नीचे टमाटर और ऊपर करेला उगाया जा रहा है। इस तरीके से एक ही जमीन पर दो फसलें तैयार हो रही हैं और उत्पादन के साथ-साथ कमाई भी बढ़ी है।

आठ वर्षों से सब्जी की खेती

राम इकबाल भगत पिछले आठ साल से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। फिलहाल वे अपने पांच बीघा खेत में टमाटर और करेला उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते साल अत्यधिक तापमान और उमस के चलते टमाटर की फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। अधिक गर्मी की वजह से पौधों में फूल और फल ठीक से विकसित नहीं हो पाए, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा।

समस्या से निकला नया मॉडल

इसी परेशानी का हल खोजते हुए उन्होंने इस बार खेती का नया तरीका अपनाया। उन्होंने टमाटर के खेत के ऊपर बांस और तार की मदद से जालीनुमा ढांचा तैयार किया और उस पर करेला की बेलें चढ़ा दीं। इस व्यवस्था में करेला की फसल ऊपर पकती है, जबकि नीचे लगे टमाटर के पौधों को प्राकृतिक छाया मिलती रहती है।

एक साथ दो फसलों का फायदा

राम इकबाल भगत के मुताबिक, करेला की बेलों से बनी हरी परत टमाटर के पौधों को तेज धूप और ज्यादा तापमान से बचाने का काम करती है। इससे फूल और फलों के खराब होने की आशंका घट जाती है और बेहतर उत्पादन मिलता है। साथ ही एक ही खेत से दो फसलें मिलने के कारण किसान की आमदनी भी बढ़ जाती है।

निवेश और मुनाफे का हिसाब

उन्होंने बताया कि एक बीघा जमीन में इस खेती के लिए करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। इस तरह पांच बीघा खेत में कुल मिलाकर लगभग पांच लाख रुपये की लागत लगती है। करीब चार महीने बाद फसल तैयार होने पर लगभग 10 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। यानी उन्हें करीब पांच लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिल जाता है।

करीब 40 लोगों को रोजगार

राम इकबाल भगत का यह मॉडल सिर्फ उनकी आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। उनके खेत में करीब 40 लोगों को काम मिलता है, जिनमें 20 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। यहां तैयार होने वाली सब्जियां स्थानीय बाजारों के अलावा दूसरे जिलों की मंडियों तक भी पहुंचाई जाती हैं, जहां व्यापारी इन्हें थोक में खरीदते हैं।

दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा

राम इकबाल बताते हैं कि पहले वे धान और गेहूं की खेती करते थे, लेकिन उससे उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिलता था। आधुनिक तकनीक के साथ सब्जी की खेती शुरू करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। उनका मानना है कि अगर किसान नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाएं तो कम जमीन में भी अच्छा उत्पादन और ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। यही वजह है कि उनकी 'दो-तल्ला खेती' अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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