होठों के आसपास के कालेपन से हैं परेशान? आजमाएं आलू का यह असरदार और आसान घरेलू नुस्खा जीवनशैली 3 घंटे पहले 2
चेहरे की खूबसूरती को प्रभावित करने वाले होठों के आसपास के कालेपन यानी पिगमेंटेशन को दूर करने के लिए ब्यूटी एक्सपर्ट ने आलू के रस का एक बेहद आसान और प्रभावी घरेलू उपाय साझा किया है।

चेहरे की चमक और खूबसूरती को बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के जतन करते हैं। लेकिन कई बार होठों के आसपास जमा होने वाला कालापन, जिसे डार्क पिगमेंटेशन भी कहा जाता है, पूरे चेहरे के आकर्षण को कम कर देता है। त्वचा की इस समस्या से निजात पाने के लिए बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, लेकिन घरेलू उपायों की मदद से भी इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। ब्यूटी एक्सपर्ट के अनुसार, घर में आसानी से उपलब्ध होने वाला आलू इस समस्या का एक बेहतरीन समाधान साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने से पिगमेंटेशन धीरे-धीरे हल्की होने लगती है।

पिगमेंटेशन कम करने के लिए ऐसे तैयार करें घरेलू पैक

इस प्राकृतिक पैक को बनाने की विधि बेहद सरल है। इसे तैयार करने के लिए आपको नीचे दी गई चीजों की आवश्यकता होगी:

  • सबसे पहले एक आलू को अच्छी तरह कद्दूकस कर लें और फिर उसका पूरा रस निचोड़कर एक कटोरी में निकाल लें।
  • अब इस आलू के रस में आधा चम्मच शहद मिलाएं।
  • इसके बाद मिश्रण में थोड़ा सा नींबू का रस डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें।

लगाने का सही तरीका और समय

इस मिश्रण को सही तरीके से लगाने पर ही इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके लिए इन स्टेप्स का पालन करें:

  • तैयार किए गए इस खास घोल को होठों के आसपास के कालेपन से प्रभावित हिस्से पर अच्छी तरह लगाएं।
  • इसे त्वचा पर कम से कम 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें ताकि त्वचा इसके गुणों को सोख सके।
  • इसके बाद अपने चेहरे को साफ और ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें।

सप्ताह में कितनी बार करें इस्तेमाल?

बेहतर परिणाम पाने के लिए इस घरेलू नुस्खे को हफ्ते में दो बार लगाया जा सकता है। हालांकि, अगर आपके होठों के आसपास बहुत ज्यादा डार्क पिगमेंटेशन या कालापन है, तो आप इसका इस्तेमाल हफ्ते में तीन बार तक भी कर सकते हैं। इसके नियमित प्रयोग से आपकी त्वचा की रंगत एक समान होने लगेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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