भिंडी की खेती: मक्का कटाई के बाद खाली खेत से कमाएं लाखों, बाढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए मुनाफे का मौका जीवनशैली एक घंटा पहले 2
बाढ़ प्रभावित इलाकों में मक्का काटने के बाद खाली पड़े खेतों में भिंडी जैसी कम अवधि की नकदी फसल किसानों को बढ़िया कमाई दे सकती है। विशेषज्ञ इस सीजन सयाजी भिंडी 2211 और पूसा ए4 किस्म लगाने और नीम के तेल के छिड़काव की सलाह दे रहे हैं।

सब्जी की खेती के लिए मशहूर भागलपुर में गेहूं, मक्का, केला और लीची समेत कई फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। लेकिन यह इलाका बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां के किसानों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह रहती है कि वे साल में सिर्फ एक ही फसल ले पाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर खेत खाली हो जाए तो उससे अतिरिक्त मुनाफा कैसे कमाया जाए।

खाली खेत में लगाएं यह नकदी फसल

यहां के अधिकांश किसान मक्के का खेत खाली होने के बाद उसे यूं ही छोड़ देते हैं। जबकि इसी खेत में कुछ खास फसलें बोकर अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। कृषि पर शोध करने वाले गूँजेश गुंजन का कहना है कि किसान जितनी कम अवधि की खेती करेंगे, उन्हें उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि मक्के का खेत खाली होते ही किसान भादो में उगने वाली सब्जियों की खेती शुरू कर सकते हैं, जो जल्दी फलन देने लगती हैं। इसी क्रम में उन्होंने सलाह दी कि अभी भिंडी की बुआई कर दी जाए, क्योंकि यह महज 40 दिनों में ही फल देना शुरू कर देती है। कम समय में मुनाफा देने वाली यह फसल बाढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए भी उपयुक्त है।

कौन-सी किस्में हैं सबसे उपयुक्त

पौधा संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल के अनुसार भागलपुर के लिए सयाजी भिंडी 2211 और पूसा ए4 समेत कई किस्में उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान अपने खेतों में लगा सकते हैं।

सावन में ही मिलने लगेगा फलन और अच्छा दाम

अगर किसान इस फसल को समय रहते लगा देते हैं तो सावन के महीने में ही इसमें फलन शुरू हो जाएगा, जब बाजार में सब्जियों के दाम आसमान छूने लगते हैं। ऐसे में किसानों को भिंडी की अच्छी कीमत मिल जाएगी।

वायरस से बचाव जरूरी

सुजीत पाल बताते हैं कि भिंडी की फसल को 'येलो वेन मोजाइक वायरस' नामक एक रोग नुकसान पहुंचाता है। इससे बचाव के लिए पौधों पर नियमित रूप से नीम के तेल का छिड़काव करने या स्टिकी स्टिक लगाने की सलाह दी जाती है, ताकि किसानों को बंपर पैदावार और बेहतर मुनाफा मिल सके।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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