सारण के नरेंद्र सिंह का अनोखा नुस्खा: नीम और शैंपू के घोल से भगाते हैं पौधों के कीड़े, जानिए बनाने की विधि जीवनशैली एक घंटा पहले 3
बिहार के सारण जिले के नरेंद्र सिंह पिछले 10 सालों से अपने 2,000 से अधिक फूलों के पौधों को कीड़ों से बचाने के लिए नीम की पत्तियों और शैंपू से बने घरेलू कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

प्रकृति प्रेमियों के लिए अपने घर और बालकनी में पेड़-पौधे लगाना एक बेहद खूबसूरत अहसास होता है। जब ये पौधे हरे-भरे रहते हैं, तो घर का वातावरण भी सकारात्मक और ऊर्जा से भरपूर रहता है। लेकिन, कई बार पेड़-पौधों में कीड़े लग जाते हैं, जिससे वे मुरझाने लगते हैं। ऐसे में पौधों को बचाने के लिए लोग बाजार से महंगे और हानिकारक रासायनिक कीटनाशक खरीदकर लाते हैं। ये रसायन न केवल पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक साबित होते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही प्रकृति प्रेमी से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने इसका एक बहुत ही आसान, घरेलू और पूरी तरह से प्राकृतिक समाधान ढूंढ निकाला है।

सारण के नरेंद्र सिंह की अनोखी पहल

बिहार के सारण जिले के दिघवारा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले आमी गांव के रहने वाले नरेंद्र सिंह पर्यावरण और प्रकृति के सच्चे प्रेमी हैं। नरेंद्र सिंह ने अपने घर में फूलों का एक बेहद सुंदर संसार बसा रखा है। वह अपने पौधों की देखभाल किसी बच्चे की तरह करते हैं। जब भी उनके पौधों में कीड़े लगते हैं, तो वह घबराते नहीं हैं, बल्कि अपने खुद के तैयार किए गए घरेलू कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं। नरेंद्र सिंह रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर नीम की पत्तियों और शैंपू से तैयार घोल का उपयोग करते हैं, जो बहुत ही कम लागत में बनकर तैयार हो जाता है और पौधों को नया जीवन देता है।

घर पर ऐसे बनाएं नीम और शैंपू का जादुई कीटनाशक

नरेंद्र सिंह के अनुसार, इस कीटनाशक को घर पर बनाना बेहद आसान है। इसे तैयार करने के लिए किसी भी महंगे उपकरण या रसायन की आवश्यकता नहीं होती है। आप इसे नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके खुद तैयार कर सकते हैं:

  • सबसे पहले नीम की ताजी पत्तियों को तोड़कर अच्छे से साफ कर लें।
  • इन पत्तियों को पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल लें ताकि नीम का सारा सत्व पानी में आ जाए।
  • पानी के अच्छी तरह उबल जाने के बाद इसे गैस से उतार लें और ठंडा होने के लिए रख दें।
  • जब यह पानी पूरी तरह ठंडा हो जाए, तो इसे किसी साफ कपड़े या छलनी की मदद से छान लें।
  • अब इस छने हुए पानी में थोड़ी मात्रा में शैंपू मिला दें।
  • शैंपू में मौजूद रसायनों के अलावा इस घोल में कोई अन्य कृत्रिम रसायन नहीं होता, जो पौधों को नुकसान पहुंचा सके।
  • इस तैयार मिश्रण को एक स्प्रे बोतल में भर लें और कीड़े लगे पौधों पर इसका अच्छे से छिड़काव करें।

यह कीटनाशक पूरी तरह से सुरक्षित है और पर्यावरण के अनुकूल भी है। इसके छिड़काव से हवा में जहरीले रसायन नहीं घुलते, जिससे हमारे आसपास की हवा भी शुद्ध रहती है।

नरेंद्र सिंह के पास है 2,000 से अधिक पौधों का खजाना

नरेंद्र सिंह का फूलों के प्रति प्रेम केवल कुछ गमलों तक सीमित नहीं है। उनके बगीचे में 2,000 से अधिक किस्मों के फूलों के पौधे मौजूद हैं। इतनी बड़ी संख्या में पौधों की देखभाल करना कोई आसान काम नहीं है। जब भी उनके बगीचे में किसी पौधे पर कीड़ों का हमला होता है, तो वह इसी घरेलू नुस्खे का सहारा लेते हैं। उनका कहना है कि इस नुस्खे के इस्तेमाल से न केवल कीड़े भाग जाते हैं, बल्कि पौधों की पत्तियों में एक नई चमक भी आ जाती है।

अड़हुल और अन्य पौधों के लिए वरदान है यह घोल

अक्सर घरों में लगे अड़हुल के पौधों में सफेद रंग के धब्बे या कीड़े लग जाते हैं, जिन्हें सामान्य बोलचाल में 'उजाला धब्बा' की बीमारी भी कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे पूरे पौधे को अपनी चपेट में ले लेती है और पौधा सूख जाता है। नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिन भी पेड़-पौधों में इस प्रकार की समस्या होती है, उन पर इस नीम और शैंपू के घोल का छिड़काव करने से जादुई असर दिखता है। इस घरेलू कीटनाशक के प्रयोग से अड़हुल के फूल और पौधे पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं।

नरेंद्र सिंह ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। वे नीम के पत्तों को उबालकर उसके पानी को छान लेते हैं और फिर उसमें थोड़ा सा शैंपू मिलाकर प्रभावित पौधों पर छिड़कते हैं। उनका यह दस साल पुराना अनुभव यह साबित करता है कि प्राकृतिक तरीके न केवल सुरक्षित होते हैं, बल्कि बेहद प्रभावी भी होते हैं। इस नुस्खे को अपनाकर आप भी अपने घर और बालकनी के पौधों को हमेशा के लिए हरा-भरा और स्वस्थ रख सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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