अलमारी में सीलन और बदबू से हैं परेशान? इन 3 चीजों को कोने में रखने से दूर होगी नमी जीवनशैली 2 घंटे पहले 2
बरसात के मौसम में कपड़ों की अलमारी में नमी और दुर्गंध आना एक आम समस्या है। कुछ घरेलू और आसान उपायों की मदद से आप अपनी अलमारी को सूखा और महकता हुआ रख सकते हैं।

अलमारी में नमी का समाधान

बरसात के दौरान हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर अलमारी में रखे कपड़ों पर पड़ता है। अक्सर सीलन के कारण कपड़ों में एक अजीब सी बासी गंध आने लगती है और उन पर फफूंदी पनपने का खतरा भी बना रहता है। यदि इन छोटी समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आपके महंगे कपड़ों को बर्बाद कर सकती हैं।

नमी सोखने के 3 कारगर उपाय

अपनी अलमारी को ताज़ा और सूखा बनाए रखने के लिए आप नीचे दी गई तीन चीजों का उपयोग कर सकते हैं:

  • बेकिंग सोडा: यह नमी और दुर्गंध को सोखने में बेहद असरदार है। एक छोटी कटोरी में बेकिंग सोडा भरें और उसे अलमारी के किसी एक कोने में सुरक्षित रख दें। बेहतर परिणाम के लिए इसे 15 से 20 दिन के अंतराल पर बदलते रहें।
  • कपूर की गोलियां: पूजा में इस्तेमाल होने वाला कपूर न केवल खुशबू फैलाता है, बल्कि सीलन की गंध को भी खत्म करता है। कपूर की कुछ गोलियों को कपड़े की एक छोटी पोटली में बांधकर अलमारी में रख दें। यह कीड़ों को दूर रखने में भी मदद करता है।
  • सिलिका जेल पैकेट: नए जूतों या बैग के साथ मिलने वाले सिलिका जेल के पैकेट्स को कभी न फेंकें। इन्हें अलमारी के विभिन्न कोनों में रखने से ये अतिरिक्त नमी को आसानी से सोख लेते हैं।

सावधानी बरतने के नियम

इन उपायों के साथ-साथ कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है ताकि कपड़े सुरक्षित रहें:

  • अलमारी में कभी भी गीले कपड़े या पसीने वाले कपड़े न रखें। कपड़ों को पूरी तरह सुखाने के बाद ही उन्हें अंदर रखें।
  • समय-समय पर अलमारी के दरवाजे खोलकर रखें ताकि ताजी हवा का संचार होता रहे और अंदर की नमी निकल जाए।
  • कोशिश करें कि महीने में 1 बार अलमारी को पूरी तरह खाली करके साफ करें और कुछ देर के लिए खुला छोड़ दें।
  • यदि कपड़ों पर फफूंदी के निशान दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत साफ करें। लंबे समय तक फफूंदी रहने से न केवल कपड़े खराब होते हैं, बल्कि यह एलर्जी का कारण भी बन सकती है।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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