पर्वतारोहण का सपना पूरा करना है तो ऐसे करें शुरुआत, एक्सपर्ट आराधना कुमारी से जानें सफलता के गुर जीवनशैली 3 घंटे पहले 2
भोजपुर की शिक्षिका और पर्वतारोही आराधना कुमारी ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया है। वे बताती हैं कि ऊंचे पहाड़ों को फतह करने के लिए शारीरिक और मानसिक मजबूती कितनी जरूरी है।

पर्वतारोहण के लिए खुद को कैसे तैयार करें

बिहार के भोजपुर जिले की रहने वाली आराधना कुमारी आज पर्वतारोहण की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुकी हैं। एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली आराधना ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर न केवल देश, बल्कि विदेश की कई कठिन चोटियों को फतह किया है। पेशे से एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका होने के बावजूद, उन्होंने पहाड़ों के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। जो लोग पहाड़ों की ऊंची चोटियों तक पहुंचने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए आराधना ने अपनी यात्रा के अनुभवों और आवश्यक तैयारियों के बारे में विस्तार से बताया है।

पर्वतारोहण की बुनियादी तैयारी

आराधना का मानना है कि पर्वतारोहण का सफर केवल एक शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता की परीक्षा भी है। उनके अनुसार, किसी भी बड़े पहाड़ पर चढ़ने से पहले खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना पहली अनिवार्य शर्त है। शुरुआती दौर किसी भी पर्वतारोही के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान शरीर को ऊंचाइयों और वहां के वातावरण के अनुसार ढालना पड़ता है। सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास ही इस कठिन राह को आसान बना सकता है।

व्यवस्थित प्रशिक्षण की भूमिका

पर्वतारोहण में दक्षता हासिल करने के लिए आराधना किसी भी संस्थान से व्यवस्थित प्रशिक्षण लेने पर जोर देती हैं। वे बताती हैं कि भारत में कई ऐसे केंद्र हैं जो पर्वतारोहण की बारीकियां सिखाते हैं। इस प्रशिक्षण के दौरान महत्वपूर्ण कौशल सिखाए जाते हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  • शारीरिक फिटनेस और स्टैमिना बढ़ाने की ट्रेनिंग।
  • पहाड़ों पर चलने और चढ़ने की सही तकनीक।
  • रस्सियों का सही इस्तेमाल और गांठ बांधने का कौशल।
  • रॉक क्लाइंबिंग और बर्फ पर संतुलन बनाना।
  • आपातकालीन स्थितियों में बचाव तकनीक।
  • बदलते और विपरीत मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के उपाय।

डर पर विजय और लक्ष्य का निर्धारण

पर्वतारोहण के दौरान कई ऐसे अवसर आते हैं जब रास्ते बहुत खतरनाक हो जाते हैं, मौसम अचानक खराब हो जाता है और शरीर पूरी तरह थक चुका होता है। आराधना के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में केवल आपकी इच्छाशक्ति ही आपको आगे बढ़ाती है। पर्वतारोही को सबसे पहले अपने मन के डर को जीतना होता है। उनका युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश है कि यदि आपने ऊंचाई छूने का सपना देख लिया है, तो शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हो, लेकिन आपका लक्ष्य हमेशा बड़ा और स्पष्ट होना चाहिए। वे कहती हैं कि पहाड़ पर कदम रखने से पहले, आपको अपनी मानसिकता को पहाड़ की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।

युवाओं के लिए प्रेरणा

एक शिक्षिका के रूप में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ आराधना अब युवाओं को अपने अनुभवों से प्रेरित कर रही हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि सपने आपकी परिस्थितियों या संसाधनों के मोहताज नहीं होते, बल्कि उन्हें पूरा करने का आपका जुनून सबसे महत्वपूर्ण है। आराधना का यह सफर उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो अपने सपनों को हकीकत में बदलने की हिम्मत रखते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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