घर की नींव हो ऐसी कि भूकंप और बाढ़ भी न हिला सके, जानें निर्माण की सही तकनीक जीवनशैली 2 घंटे पहले 3
पूर्णिया के विशेषज्ञ प्रोफेसर ने घर की नींव को अभेद्य बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग सुझाव साझा किए हैं, ताकि आपदा के समय भी आपका मकान सुरक्षित रहे।

मजबूत घर के लिए नींव का महत्व

हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर सुरक्षित और मजबूत हो। अक्सर लोग घर बनवाते समय नींव की मजबूती पर विशेष ध्यान देते हैं और अच्छी क्वालिटी के सीमेंट का उपयोग भी करते हैं, फिर भी कई बार घर की संरचना उतनी टिकाऊ नहीं बन पाती। पूर्णिया राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के हेड, प्रोफेसर सौरभ कुमार के अनुसार, मकान की असल ताकत उसकी नींव में छिपी होती है। यदि निर्माण के दौरान कुछ तकनीकी बातों का ध्यान रखा जाए, तो भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान भी आपका घर सुरक्षित खड़ा रह सकता है।

निर्माण शुरू करने से पहले जरूरी जांच

प्रोफेसर सौरभ कुमार का कहना है कि नींव की खुदाई से पहले सबसे महत्वपूर्ण कदम जमीन की जांच करना है। निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व दो चीजों का परीक्षण करना अनिवार्य है:

  • मिट्टी की गुणवत्ता: जियो टैग के आधार पर जमीन की मिट्टी की जांच करें ताकि यह पता चल सके कि वह कितनी भार सहन कर सकती है।
  • पानी की जांच: निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता का परीक्षण भी बेहद जरूरी है। इन दोनों जांचों के बिना नींव का काम शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है।

फाउंडेशन और स्ट्रक्चर की मजबूती

घर की लोड कैपेसिटी यानी भार सहने की क्षमता बढ़ाने के लिए एक सही फ्रेम स्ट्रक्चर का होना जरूरी है। प्रोफेसर के मुताबिक, कुर्सी उठाकर सीधे फर्श बनाने के बजाय, नीचे फ्रेम स्ट्रक्चर का निर्माण करना चाहिए। इससे पूरी बिल्डिंग का वजन समान रूप से वितरित होता है और मजबूती में कई गुना इजाफा होता है। नींव के साथ-साथ कॉलम और बीम के बीच सही कनेक्टिविटी बनाना भी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। क्रॉसिंग बीम का उपयोग करें और कॉलम को एक-दूसरे से मजबूती से जोड़ें ताकि बिल्डिंग के नीचे एक बेहतर लॉकिंग प्रक्रिया तैयार हो सके।

सरिया और इलेक्ट्रिकल सुरक्षा

निर्माण में सरिया का सही इस्तेमाल मजबूती के लिए आधार है। नींव के लिए 12 mm से 16 mm तक के सरिये का उपयोग करना चाहिए। कॉलम और कास्टिंग के दौरान भी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, आपदाओं से बचाव के लिए एक और अहम पहलू इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस है। घर में शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं से बचने के लिए बिजली के तारों और स्विच बोर्ड को हमेशा फ्लोर लेवल से ऊंचाई पर ही रखें। इन्हें कभी भी निचले स्तर पर नहीं छोड़ना चाहिए।

सीमेंट का चयन और कुर्सी की ऊंचाई

नींव की मजबूती के लिए सीमेंट के ग्रेड का सही चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। प्रोफेसर कुमार के अनुसार, बाजार में उपलब्ध 43 और 53 ग्रेड का ओपीसी सीमेंट घर की नींव के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। गुणवत्ता वाले सीमेंट के प्रयोग से ही स्ट्रक्चर में मजबूती आती है। इसके अलावा, स्थान के हिसाब से घर की कुर्सी की ऊंचाई निर्धारित करना भी जरूरी है:

  • सामान्य क्षेत्रों में जहां बाढ़ का खतरा नहीं है, वहां 4 से 5 फीट की ऊंचाई मानक मानी जाती है।
  • जिन क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना अधिक रहती है, वहां नींव की मजबूती और ऊंचाई 6 से 8 फीट तक रखना सुरक्षित होता है।

इन सभी तकनीकी सुझावों को अपनाकर आप न केवल अपने घर को भविष्य की आपदाओं से बचा सकते हैं, बल्कि उसकी उम्र और टिकाऊपन को भी कई दशकों तक बढ़ा सकते हैं। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने के बजाय विशेषज्ञों की सलाह और सही सामग्री का चुनाव करना ही बुद्धिमानी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप