गार्डनिंग टिप्स: बालकनी और गार्डन को फूलों से महकाएगा बालसम, सितंबर में लगाने से सालभर मिलेंगे लाल-गुलाबी सुंदर फूल जीवनशैली एक घंटा पहले 4
घर के बगीचे या बालकनी को खूबसूरत फूलों से सजाने के लिए बालसम का पौधा एक बेहतरीन विकल्प है, जिसे बेहद कम देखभाल के साथ आसानी से उगाया जा सकता है।

अगर आप अपने घर की बालकनी, छत या बगीचे को बेहद कम मेहनत में खूबसूरत और रंग-बिरंगे फूलों से सजाना चाहते हैं, तो बालसम का पौधा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है और अनुकूल मौसम में इसे बीजों की मदद से बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस पौधे को बहुत ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती है, लेकिन अगर आप इसमें ढेरों फूल चाहते हैं, तो मिट्टी, धूप, पानी और खाद का सही संतुलन होना बेहद जरूरी है।

बालसम का पौधा लगाने का सही समय

इस पौधे को लगाने के लिए सितंबर का महीना सबसे उत्तम माना जाता है। इस मौसम में बीजों के अंकुरण के लिए सही तापमान मिलता है, जिससे पौधा तेजी से अपनी जड़ें मजबूत कर लेता है।

मिट्टी कैसे तैयार करें?

बालसम के पौधे के लिए ऐसी मिट्टी तैयार करें जिसमें पानी बिल्कुल न ठहरे। इसके लिए मिट्टी तैयार करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • साधारण बगीचे की उपजाऊ मिट्टी लें।
  • मिट्टी में थोड़ी रेत या कोकोपीट मिलाएं ताकि जल निकासी अच्छी रहे।
  • पौधे के बेहतर विकास के लिए भरपूर मात्रा में गोबर की जैविक खाद या वर्मीकंपोस्ट का इस्तेमाल करें।

धूप और पानी की सही मात्रा

इस पौधे को अच्छी तरह बढ़ने के लिए मध्यम धूप की आवश्यकता होती है। इसे ऐसे स्थान पर रखें जहां रोजाना कम से कम ३ से ४ घंटे की अच्छी धूप मिल सके। तेज धूप से पौधे की पत्तियां झुलस सकती हैं। वहीं, पानी देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मिट्टी में नमी तो बनी रहे, लेकिन गमले में पानी जमा न होने पाए, क्योंकि ज्यादा पानी से इसकी जड़ें सड़ सकती हैं।

पौधे को घना बनाने का आसान तरीका

अगर आप चाहते हैं कि आपके बालसम के पौधे में सालभर लाल, गुलाबी और सुंदर फूल खिलते रहें, तो पौधे के शुरुआती विकास के दौरान उसके ऊपरी हिस्से की पिंचिंग यानी हल्की छंटाई कर दें। ऐसा करने से पौधे में नई शाखाएं निकलेंगी और वह अधिक घना हो जाएगा। पौधे में जितनी अधिक शाखाएं होंगी, फूलों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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