एलोवेरा के पौधे की मानसून में ऐसे करें देखभाल, पत्तियों में भरेगा गाढ़ा जेल और तेजी से बढ़ेगा पौधा जीवनशैली 12 घंटे पहले 1
बरसात के मौसम में एलोवेरा के पौधे को सड़ने और फंगस से बचाने के लिए खास देखभाल की जरूरत होती है। बागवानी विशेषज्ञ मो आलम से जानिए इस मौसम में पौधे की सुरक्षा और बेहतर विकास के जरूरी टिप्स।

मानसून का सुहाना मौसम जहां कई पेड़-पौधों के लिए जीवनदायी साबित होता है, वहीं एलोवेरा जैसे कम पानी वाले पौधों के लिए यह समय थोड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। बारिश के दिनों में अत्यधिक नमी और गमले में पानी का ठहराव एलोवेरा के पौधे को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। ऐसे में इस मौसम में इसकी विशेष देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि इसकी पत्तियों में गाढ़ा जेल बना रहे और पौधे की वृद्धि सुचारू रूप से होती रहे।

बरसात में क्यों बढ़ जाती है एलोवेरा की परेशानी?

एलोवेरा मूल रूप से एक मरुस्थलीय पौधा है जिसे बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। बरसात के दिनों में वातावरण में आर्द्रता यानी नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। अगर गमले की मिट्टी लगातार गीली रहे, तो पौधे की जड़ें सड़ने लगती हैं। इसके कारण पत्तियों का रंग पीला पड़ने लगता है और उनमें मौजूद जेल भी पतला या खराब होने लगता है।

बागवानी विशेषज्ञ मो आलम के महत्वपूर्ण सुझाव

इस विषय पर विशेष जानकारी देते हुए बागवानी विशेषज्ञ मो आलम ने बताया कि मानसून के दौरान एलोवेरा के पौधे को सीधे तौर पर होने वाली भारी बारिश से बचाना सबसे पहला कदम होना चाहिए। उनके अनुसार, पौधे को किसी ऐसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर देना चाहिए जहां उस पर सीधी बारिश की बूंदें न गिरें। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि पौधे को हल्की धूप और लगातार ताजी हवा मिलती रहे ताकि मिट्टी में अतिरिक्त नमी न टिके।

एलोवेरा की बेहतर ग्रोथ के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

बरसात के मौसम में पौधे को स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रखने के लिए निम्नलिखित सावधानियों और उपायों को अपनाना चाहिए:

  • जल निकासी की उचित व्यवस्था: गमले के निचले हिस्से में बने छेद का साफ होना सबसे जरूरी है। यदि पानी गमले में रुकेगा, तो जड़ें सड़ जाएंगी। इसलिए जल निकासी की लगातार जांच करते रहें।
  • मिट्टी की नमी का स्तर: पौधे में दोबारा पानी तभी डालें जब गमले की ऊपरी मिट्टी पूरी तरह से सूखी हुई महसूस हो। बारिश के मौसम में हवा में पहले से ही काफी नमी होती है, इसलिए बहुत कम पानी देने की जरूरत होती है।
  • हवा और धूप का संतुलन: एलोवेरा को ऐसे स्थान पर रखें जहां हवा का प्रवाह अच्छा हो। यदि दिन में कुछ समय के लिए हल्की धूप निकलती है, तो पौधे को वहां रखें ताकि फंगस लगने का खतरा कम हो सके।
  • पत्तियों की नियमित निगरानी: पौधे की पत्तियों पर लगातार नजर रखें। यदि पत्तियां गलने लगें या उन पर काले-भूरे धब्बे दिखाई दें, तो समझ जाएं कि पौधे में फंगस का संक्रमण हो रहा है। ऐसे में प्रभावित हिस्सों को तुरंत हटा देना चाहिए।

मिट्टी का सही चयन और फंगस से बचाव

एलोवेरा को उगाने के लिए हमेशा ऐसी मिट्टी का उपयोग करना चाहिए जिसमें पानी न ठहरे। इसके लिए रेतीली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मानसून के समय फंगस से सुरक्षा के लिए मिट्टी में थोड़ी मात्रा में जैविक खाद मिलाई जा सकती है, जो प्राकृतिक रूप से पौधे को जरूरी पोषण प्रदान करती है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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