धान की खेती: कल्ले फूटने के दौरान इन बातों का रखें खास ख्याल, फसल की पैदावार में होगा इजाफा छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
सितंबर का महीना धान की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान पौधों में कल्ले विकसित होते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए पोटाश और संतुलित खाद के सही इस्तेमाल की सलाह दी है।

धान की फसल का संवेदनशील चरण

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सितंबर का महीना धान की खेती के लिए एक निर्णायक मोड़ लेकर आया है। इस समय खेतों में लगी धान की फसल कल्ले फूटने यानी विकास के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रही है। कृषि विशेषज्ञ संजय यादव का मानना है कि फसल का यही वह समय है जब किसान उसकी सही देखभाल करके पैदावार को काफी बढ़ा सकते हैं। पौधों के विकास की इस अवस्था में की गई थोड़ी सी चूक पूरे उत्पादन पर असर डाल सकती है।

पोषण प्रबंधन और कल्ले का विकास

कृषि विशेषज्ञ संजय यादव के अनुसार, सितंबर की शुरुआत धान के पौधों में कल्ले निकलने के लिहाज से बहुत संवेदनशील है। उन्होंने किसानों को निर्देश दिया है कि वे अपने खेतों में जाकर फसल की मौजूदा स्थिति का बारीकी से निरीक्षण करें। यदि पौधों को विकास के लिए अतिरिक्त पोषक तत्वों की आवश्यकता दिख रही है, तो समय रहते खाद का उचित छिड़काव करना बेहद जरूरी है। सही समय पर दिया गया पोषण कल्ले के बेहतर विकास को सुनिश्चित करता है।

पोटाश की उपयोगिता और फायदे

फसल की मजबूती के लिए पोटाश का प्रयोग करना एक प्रभावी तकनीक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ की फसल में पोटाश का संतुलित उपयोग पौधों को आंतरिक मजबूती प्रदान करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि पौधे विपरीत मौसम और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं। इसके साथ ही, पोटाश का सही इस्तेमाल धान के दानों की चमक, उनके वजन और समग्र गुणवत्ता में सुधार करता है, जिससे अंततः किसानों को बाजार में बेहतर पैदावार मिलती है।

रोगों से बचाव और संतुलित पोषण

अक्सर देखा जाता है कि कमजोर पौधे कीटों और बीमारियों का शिकार जल्दी हो जाते हैं। विशेषज्ञ संजय यादव ने स्पष्ट किया कि यदि पौधों को उचित पोषण मिलता रहेगा, तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में स्वतः सुधार होगा। इससे फसल के कीटों और रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। हालांकि, किसानों को यह सावधानी जरूर बरतनी चाहिए कि खाद और पोटाश की मात्रा का फैसला खेत की मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखकर ही करें। बिना सोचे-समझे उर्वरकों का प्रयोग नुकसानदेह भी हो सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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