तेलंगाना में 2028 की सियासी जंग का आगाज़: नितिन नवीन के दावे पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का तीखा हमला
भारत
2 महीने पहले
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तेलंगाना में 2028 विधानसभा चुनाव की बिसात बिछी
तेलंगाना की राजनीति में वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। दोनों दल इस आगामी चुनाव को अपनी राजनीतिक साख बचाने और वर्चस्व साबित करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहे हैं। यह विवाद अब केवल शब्दों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा निर्धारित करने वाली एक बड़ी चुनौती बन गया है। तेलंगाना के सियासी गलियारों में अब हर तरफ 2028 के नतीजों की चर्चा सुनाई देने लगी है।
नितिन नवीन की हुंकार: बीजेपी की सत्ता का दावा
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में अपने तीन दिवसीय तेलंगाना दौरे के दौरान यह बड़ा दावा किया कि आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार का गठन होगा। उन्होंने इस दावे के पीछे तर्क देते हुए कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को तेलंगाना में करीब 35 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे, जो यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य में पार्टी का जनाधार काफी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरें और गांव-गांव जाकर संगठन को और अधिक सुदृढ़ करें।
नितिन नवीन ने अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि जिस प्रकार से पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने एक लंबा और कठिन संघर्ष किया और अंततः एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी, ठीक उसी तर्ज पर तेलंगाना में भी पार्टी जनता का भरोसा हासिल करेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के कार्यकर्ताओं की मेहनत और सतत संघर्ष ने ही कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंकने का काम किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि तेलंगाना में भी बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत एक बड़ा राजनीतिक बदलाव लाने में सफल होगी।
बीजेपी अध्यक्ष ने मौजूदा कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि तेलंगाना आज दिल्ली का एटीएम बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के खजाने का पैसा दिल्ली भेजा जा रहा है और कांग्रेस सरकार अपने किए गए चुनावी वादों को पूरा करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि जिस दिन तेलंगाना में बीजेपी सत्ता में आएगी, वह राज्य सरकार द्वारा खर्च किए गए हर एक रुपये का हिसाब लेगी। साथ ही, उन्होंने मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर भी मुखर होते हुए कहा कि बीजेपी इस विषय पर जनता के बीच जाएगी और अपना विरोध दर्ज कराएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि 2014 से पहले देश भ्रष्टाचार और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था, लेकिन मोदी सरकार ने देश को भ्रष्टाचार मुक्त शासन दिया है और भारत का आत्मविश्वास बढ़ाया है। अनुच्छेद 370 जैसे ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी अब विकसित भारत और विकसित तेलंगाना के विजन के साथ आगे बढ़ रही है।
रेवंत रेड्डी का पलटवार: बीजेपी की रणनीति पर सवाल
बीजेपी के इन दावों का मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बेहद आक्रामक अंदाज में जवाब दिया है। नितिन नवीन के दौरे पर तंज कसते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा कि अभी हाल ही में कोई व्यक्ति यहां आया था, नवीन या जो भी उसका नाम है। वह दावा कर रहा है कि अगली सरकार उनकी बनेगी। रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी ने यही दावे किए थे, लेकिन वहां उन्हें सरकार बनाने में 15 साल का लंबा समय लग गया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की जनता बहुत समझदार है और वह ऐसे खोखले दावों का जवाब देना बखूबी जानती है।
रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं। उन्होंने बीजेपी को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी रणनीति कहीं और सफल हुई भी है, तो तेलंगाना में वह बिल्कुल नहीं चलने वाली है। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस का संगठन पूरी तरह से सक्रिय और तैयार है और बीजेपी की हर राजनीतिक चाल का जवाब देने में सक्षम है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे बहस की चुनौती देते हुए पूछा कि आइए तुलना करते हैं बीआरएस के 10 साल, केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल और कांग्रेस सरकार के ढाई साल के काम की। उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किया कि हर गरीब के बैंक खाते में 15 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, वह वादा कहाँ गया? किसानों की आय दोगुनी करने का दावा और हर साल दो करोड़ नौकरियों का वायदा आज कहां है? उन्होंने कहा कि अब राज्य की जनता वादों की राजनीति से ऊब चुकी है और परिणामों की राजनीति देखना चाहती है।
रेवंत रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी हर छोटे-बड़े चुनाव में केवल प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा आगे कर वोट मांगती है। उन्होंने कहा कि वार्ड के चुनाव से लेकर सरपंच तक के चुनावों में मोदी का नाम इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इन चुनावों को स्थानीय नेताओं के काम और जन समस्याओं के आधार पर लड़ा जाना चाहिए।
बीजेपी का जवाब: मुख्यमंत्री पर अहंकार का आरोप
रेवंत रेड्डी के इन तीखे बयानों पर तेलंगाना बीजेपी ने कड़ा ऐतराज जताया है। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने मुख्यमंत्री के बयान को उनकी राजनीतिक बौखलाहट और बीजेपी के बढ़ते जनाधार के डर के रूप में वर्णित किया है। उन्होंने कहा कि नितिन नवीन ने कांग्रेस मुक्त तेलंगाना का जो संकल्प लिया है, उससे राज्य सरकार पूरी तरह से घबरा गई है।
रामचंद्र राव ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बीजेपी अध्यक्ष के नाम का मजाक उड़ाना पूरी तरह से अशोभनीय है और यह राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समझ चुकी है कि राज्य में बीजेपी मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में तेजी से उभर रही है और इसी वजह से कांग्रेसी नेतृत्व बौखलाहट में बीजेपी पर निजी हमले कर रहा है।
तेलंगाना का भविष्य और राजनीतिक दिशा
कुल मिलाकर, तेलंगाना की राजनीति एक नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर रही है। एक तरफ बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले 35 प्रतिशत वोटों को आधार बनाकर 2028 में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रही है, वहीं दूसरी ओर रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस बीजेपी के इन दावों को पूरी तरह से नकार रही है। आने वाले समय में यह संघर्ष और अधिक तीव्र होने की उम्मीद है।
बीजेपी आने वाले दिनों में राज्य सरकार की कथित विफलताओं, भ्रष्टाचार और अधूरे चुनावी वादों को मुद्दा बनाएगी। वहीं, कांग्रेस केंद्र सरकार के अधूरे वादों और अपनी राज्य सरकार के प्रदर्शन को जनता के सामने रखेगी। इस पूरे सियासी घमासान के बीच BRS भी अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने की हर संभव कोशिश करेगी। अंततः 2028 का विधानसभा चुनाव केवल सत्ता बदलने की जंग नहीं होगा, बल्कि यह इस बात का पैमाना बनेगा कि तेलंगाना की जनता के दिलो-दिमाग पर किसका नेतृत्व और विचारधारा सबसे अधिक हावी है।
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