राष्ट्रीय राजनीति
2 महीने पहले
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विचारों
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों अल्पसंख्यकों और खासकर मुस्लिम समुदाय के मतों को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। इसी बीच, द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय को पूरी सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी हमेशा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगी। उदयनिधि ने जोर देकर कहा कि डीएमके और अल्पसंख्यकों के बीच का रिश्ता राजनीतिक नफा-नुकसान से परे आपसी भरोसे पर टिका हुआ है और इसे विरोधियों के किसी भी भ्रामक प्रचार से कमजोर नहीं किया जा सकता है।
थिरुवेरकाडु में विवाह समारोह के दौरान बड़ा बयान
चेन्नई के थिरुवेरकाडु में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने यह महत्वपूर्ण बातें कहीं। अवसर था डीएमके मुख्यालय के सचिव ‘थुरईमुगम’ काजा की पोती की शादी के रिसेप्शन का, जहाँ बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे। इस समारोह को संबोधित करते हुए विपक्ष के नेता ने कहा कि अल्पसंख्यकों की रक्षा करना डीएमके के सिद्धांतों में शामिल है। पार्टी हमेशा उनके साथ खड़ी रही है और भविष्य में भी उनके हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डीएमके का धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति ही उसकी राजनीति के केंद्र बिंदु हैं।
इसी मंच से उदयनिधि स्टालिन ने उन पूर्व सहयोगियों और बागियों पर भी तीखा निशाना साधा जो पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। बिना किसी का सीधे तौर पर नाम लिए उन्होंने तीखा तंज कसा और कहा, “कुछ लोग कुर्सी (सोफा) मिलते ही हमें छोड़कर चले गए”। लेकिन इसके विपरीत, पार्टी के सबसे वफादार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों ने कभी हमारा साथ नहीं छोड़ा। वे हर कठिन राजनीतिक दौर और चुनौतियों के समय डीएमके के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहे हैं। उदयनिधि ने कहा कि अल्पसंख्यकों का यह निरंतर और अटूट समर्थन ही पार्टी के साथ उनके गहरे व ऐतिहासिक रिश्ते का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भ्रामक प्रचार करने वाले विरोधियों पर बरसे उदयनिधि
विपक्ष के नेता ने राजनीतिक विरोधियों पर समाज को बांटने और गलत अफवाहें फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसी विभाजनकारी ताकतें कभी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सकेंगी। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को भरोसा दिलाते हुए कहा, “चाहे कोई भी हमारे बीच दरार पैदा करने की कोशिश करे या हमारे खिलाफ कितनी भी अफवाहें फैलाए, डीएमके हमेशा अल्पसंख्यकों और खासकर मुस्लिम समुदाय के लिए एक ढाल की तरह खड़ी रहेगी।”
अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एमके स्टालिन हमेशा तमिलनाडु के अधिकारों और राज्य की जनता के कल्याण के लिए काम करेंगे। उदयनिधि ने सभा को यह भी बताया कि वे इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व करने आए हैं, क्योंकि उनके पिता एमके स्टालिन, जिन्हें मूल रूप से इस रिसेप्शन में शामिल होना था, अपरिहार्य कारणों से नहीं आ सके।
शादी समारोह में दिखा राजनीतिक शिष्टाचार का अनूठा नजारा
इस समारोह के दौरान तमिलनाडु की राजनीति का एक अनोखा और सौहार्दपूर्ण दृश्य भी देखने को मिला। जब ‘नाम तमिलर काची’ (एनटीके) के मुख्य समन्वयक सीमन शादी में मेहमान के रूप में पहुंचे, तो उदयनिधि स्टालिन ने खुद आगे बढ़कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें आदरपूर्वक अंदर तक लेकर गए। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नेताओं के बीच की यह आपसी गर्मजोशी वहाँ मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
इसके साथ ही, उदयनिधि ने ‘थुरईमुगम’ काजा के पार्टी के साथ दशकों पुराने सफर और वफादारी को याद किया। उन्होंने 1989 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों का एक बेहद खास किस्सा साझा किया। उस चुनाव में काजा एआईएडीएमके के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे और हार्बर विधानसभा सीट से डीएमके के दिवंगत दिग्गज नेता एम. करुणानिधि के सामने मैदान में थे। उदयनिधि ने बताया कि उस समय वोटों की गिनती पूरी होने से पहले ही, चुनावी प्रतिद्वंद्विता को भुलाकर काजा ने व्यक्तिगत रूप से करुणानिधि को माला पहनाकर बधाई दी थी। यह कदम उनकी उच्च राजनीतिक मर्यादा और शिष्टाचार को दर्शाता था। बाद में काजा डीएमके में शामिल हो गए और पार्टी के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम किया।
उदयनिधि स्टालिन ने याद दिलाते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अक्सर काजा और पार्टी के वरिष्ठ नेता पूची एस. मुरुगन को डीएमके मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ के 'दो स्तंभ' के रूप में संबोधित करते हैं, जो पार्टी के प्रति उनके बेमिसाल योगदान को सम्मान देने का तरीका है। इस विवाह समारोह में डीएमके के कई अन्य वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी तादाद में शामिल हुए, जिससे उदयनिधि को अल्पसंख्यक कल्याण और राज्य में समावेशी शासन के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराने का मंच मिला।
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