धर्म परिवर्तन के बाद नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला भारत 7 घंटे पहले 4
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे धर्म अपनाने वाले लोग अपनी पिछली सामाजिक स्थिति के आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या पिछड़े वर्ग से संबंधित है, तो वह अपना धर्म बदलकर दूसरे धर्म में जाने के बाद पुराने आरक्षण का लाभ प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू सामाजिक ढांचे में जो व्यक्ति जिस सामाजिक पिछड़ेपन का सामना करता है, वह स्थिति दूसरे धर्म को स्वीकार करने के बाद स्वतः ही लागू नहीं होती। धर्म परिवर्तन के साथ ही उस व्यक्ति की सामाजिक और धार्मिक पहचान बदल जाती है।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के पूर्ववर्ती निर्णय को सही ठहराया है। गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी रुख को अपनाते हुए तमिलनाडु सरकार की विशेष याचिका को खारिज कर दिया है।

तमिलनाडु सरकार को लगा बड़ा झटका

कोर्ट ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि केवल इस्लाम धर्म अपना लेने मात्र से कोई व्यक्ति राज्य द्वारा निर्धारित पिछड़े मुस्लिम समुदायों की श्रेणी में स्वतः शामिल नहीं हो जाता। आरक्षण की पात्रता और संविधान में निर्धारित नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति का दर्जा धर्म संबंधी मानदंडों से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने मार्च 2024 में एक सरकारी आदेश पारित किया था। इस आदेश के माध्यम से यह व्यवस्था की गई थी कि पिछड़े वर्ग, अति पिछड़े वर्ग, अधिसूचित समुदायों और अनुसूचित जाति से इस्लाम में परिवर्तित होने वाले लोगों को पिछड़े मुस्लिम वर्ग का प्रमाणपत्र दिया जाए और आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाए। मद्रास हाईकोर्ट द्वारा इस आदेश को रद्द किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने उस व्यवस्था पर पूर्ण विराम लगा दिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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