BV-300 Layer मुर्गी पालन से हर महीने 15,000 रुपये तक की कमाई, जानें इस खास किस्म की खूबियां झारखंड 2 महीने पहले 87
झारखंड के कृषि व्यापार मेले में आकर्षण का केंद्र बनी BV-300 Layer मुर्गी की किस्म, जो 24 महीने तक लगातार अंडा देने की क्षमता रखती है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं को कम निवेश और कम देखभाल में आत्मनिर्भर बना रहा है।

रांची के कृषि मेले में दिखी खास तकनीक

झारखंड सरकार की ओर से मोराबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में आधुनिक पशुपालन की नई मिसाल देखने को मिली। यहां किसानों और महिला समूहों को स्वरोजगार के लिए BV-300 Layer मुर्गी की प्रजाति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यह मॉडल विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

कम निवेश में बड़ा मुनाफा

बरपोखर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि Ashish Kumar ने बताया कि राज्य के सभी 24 जिलों में 100 लेयर बर्ड केज सिस्टम के जरिए मुर्गी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पूरे सेटअप की कुल लागत लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये है, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं:

  • BV-300 Layer मुर्गियां।
  • आधुनिक केज सिस्टम और शेड।
  • 1 महीने का फीड और जरूरी दवाइयां।
  • विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन।
  • जरूरत पड़ने पर वेटरनरी डॉक्टर की सहायता।

क्यों खास है BV-300 Layer?

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी लगातार अंडा देने की क्षमता है। इसके बारे में मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • यह मुर्गी 24 महीने तक रोजाना अंडा देने में सक्षम है।
  • अंडा उत्पादन के लिए मुर्गे की कोई आवश्यकता नहीं होती, जिससे पालन का खर्च कम हो जाता है।
  • चूजों को 90 दिनों तक ब्रूडिंग के बाद स्थानीय वातावरण के अनुकूल तैयार किया जाता है, जिसके 25 से 30 दिनों बाद ही वे अंडा देना शुरू कर देती हैं।
  • इस व्यवसाय को अपनाकर महिलाएं हर महीने लगभग 15,000 रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा सकती हैं।

यह केज सिस्टम मॉडल न केवल कम जगह घेरता है, बल्कि इसमें देखभाल भी बहुत आसान है। इस वैज्ञानिक तरीके से जुड़कर महिलाएं अपने परिवार की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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