गन्ने की बंपर पैदावार चाहिए तो जुलाई से सितंबर के बीच न करें ये चूक, अपनाएं 4 अचूक उपाय भारत एक महीने पहले 46
गन्ने की फसल के लिए जुलाई से सितंबर का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसे ग्रैंड ग्रोथ फेज कहा जाता है। इस दौरान सही प्रबंधन से आप फसल को बीमारियों से बचाकर बंपर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

गन्ने की फसल का सबसे संवेदनशील दौर

खेती-किसानी में गन्ने की फसल का एक विशेष महत्व है और इसे सबसे अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई, अगस्त और सितंबर का समय गन्ने की फसल के विकास के लिए सबसे निर्णायक होता है। इस कालखंड को कृषि विज्ञान की भाषा में ग्रैंड ग्रोथ फेज कहा जाता है। यह वह समय है जब गन्ने की फसल अपनी कुल वृद्धि का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हासिल करती है। इस दौरान पौधे की लंबाई और मोटाई तेजी से बढ़ती है, जिसके कारण उसे उचित पोषण और सुरक्षा की जरूरत होती है। यदि किसान इस दौरान थोड़ी भी सावधानी बरतें, तो पैदावार में होने वाले भारी नुकसान से बचा जा सकता है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए कुछ विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि वे अपनी फसल को इस महत्वपूर्ण चरण में सुरक्षित रख सकें।

विकास की गति और सिंचाई का प्रबंधन

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी संजीव कुमार पाठक के अनुसार, इस दौरान गन्ने की वृद्धि दर बहुत तेज होती है। इस समय गन्ना प्रति सप्ताह औसतन 4.9 से 5 इंच तक बढ़ सकता है। अपनी फसल की इस क्षमता को बनाए रखने के लिए मिट्टी में नमी का होना अत्यंत आवश्यक है। मानसून के मौसम में कई बार ऐसा होता है कि बारिश लंबी अवधि के लिए रुक जाती है। ऐसी स्थिति में, यदि 15 से 20 दिनों तक लगातार बारिश न हो, तो किसानों को बिना देरी किए खेतों में सिंचाई का प्रबंध करना चाहिए। पर्याप्त सिंचाई न होने पर गन्ने की बढ़वार रुक सकती है और अंत में इसका सीधा असर फसल के वजन और गुणवत्ता पर पड़ता है।

कीट और पोक्का बोइंग रोग से सुरक्षा

जुलाई से सितंबर के बीच गन्ने की फसल पर कई प्रकार के हानिकारक कीटों और बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है। इनमें से पोक्का बोइंग रोग इस मौसम में सबसे ज्यादा दिखाई देता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेतों का नियमित अंतराल पर निरीक्षण करते रहें। यदि फसल के पत्तों या तनों में किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत स्थानीय कृषि विशेषज्ञों या वैज्ञानिक सलाहकार से संपर्क करना चाहिए। समय रहते अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने से बीमारी को खेत में फैलने से रोका जा सकता है।

लाल सड़न रोग की रोकथाम

लाल सड़न या रेड रोट रोग गन्ने की फसल के लिए सबसे घातक बीमारियों में से एक है। जुलाई के बाद इसके लक्षण खेतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। इस रोग की पहचान यह है कि गन्ने के अगोले की पत्तियां अचानक सूखने लगती हैं। यदि आप किसी संदिग्ध गन्ने को बीच से चीरकर देखते हैं, तो उसके अंदर का गूदा लाल रंग का हो जाता है और उसमें सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। यदि खेत में ऐसा कोई भी पौधा दिखाई दे, तो उसे जड़ से उखाड़कर तुरंत नष्ट कर देना चाहिए। इसके बाद उस स्थान पर 10 से 20 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिट्टी से अच्छी तरह ढंक देना चाहिए। यह प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रोग पानी के माध्यम से स्वस्थ पौधों में तेजी से फैलता है, जिसे रोकना जरूरी है।

तेज हवाओं से बचाव हेतु बंधाई

मॉनसून के दौरान अक्सर तेज हवाओं और भारी बारिश का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में गन्ने की फसल के गिरने का खतरा सबसे अधिक होता है। फसल गिरने से न केवल उत्पादन में कमी आती है, बल्कि गन्ने की गुणवत्ता और मिठास पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। जिन किसानों ने शरदकालीन बुआई की थी, उनकी फसल अब बंधाई के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि फसल को गिरने से बचाने के लिए समय पर पहली बंधाई जरूर पूरी करें। सही समय पर की गई बंधाई न केवल पौधे को सहारा देती है, बल्कि उसे विपरीत मौसम की मार से सुरक्षित रखते हुए फसल की गुणवत्ता को भी बनाए रखती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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