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एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। यहां समूहों से जुड़कर कई परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और इस बदलाव में महिलाओं की हिस्सेदारी साफ नजर आ रही है। इसी कड़ी में फिरोजाबाद के एक गांव की रहने वाली महिला ने कुछ साल पहले एक समूह से जुड़कर अपना कारोबार शुरू किया और घर पर ही मसाले पीसकर बेचना आरंभ कर दिया। इसके बाद उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई।
आज यह महिला घर बैठे मसाले तैयार करके अच्छी कमाई कर रही है। इतना ही नहीं, उसने अपने मसालों का एक ब्रांड भी खड़ा कर लिया है, जो अब नाम से बाजार में बिकता है। आने वाले समय में फिरोजाबाद के आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी इन्हीं के तैयार मसाले इस्तेमाल किए जाएंगे, जिससे उनकी आमदनी और बढ़ने की उम्मीद है।
समूह से जुड़कर रखी कारोबार की नींव
फिरोजाबाद के अरांव ब्लॉक में रहने वाली रेनू देवी ने बातचीत में बताया कि पहले वह घर पर ही रहती थीं और खेती-बाड़ी का काम संभालती थीं। बाद में उन्हें रानी अवंतीबाई महिला समूह की जानकारी मिली और इससे जुड़ने पर उन्हें मसाले बनाने की ट्रेनिंग हासिल हुई। इसके बाद उन्होंने घर पर ही मसाले तैयार करने वाली मशीन लगाई।
इस कारोबार को खड़ा करने के लिए एनआरएलएम विभाग की ओर से उन्हें 35 हजार की आर्थिक मदद मिली, जबकि 50 हजार रुपए की निजी मदद से भी उन्हें सहारा मिला। धीरे-धीरे उन्होंने मसाले तैयार करना शुरू किया। वह मसालों को पूरी तरह शुद्ध तरीके से बनाती हैं, जिसके चलते उनका काम चल निकला। इसी दौरान उन्होंने अपने मसालों का एक ब्रांड भी बना लिया, जिससे अब उत्पाद नाम से ही बिकता है।
लाखों में पहुंचा सालाना टर्नओवर
रेनू देवी ने बताया कि उनके यहां तैयार होने वाले मसाले अच्छी कीमत पर बिकते हैं। बेसन, हल्दी और दाल जैसी चीजों के पैकेट की कीमत 30 रुपए से लेकर 65 रुपए तक रहती है। इस कारोबार से अब उनकी अच्छी आमदनी हो रही है।
उनके मुताबिक, इस कारोबार के जरिए वह हर महीने 25 से 30 हजार की कमाई कर रही हैं, जिससे सालभर में उन्हें लाखों की आमदनी हो जाती है। वह रोजाना 5 से 8 किलो मसाले बेचती हैं। अब उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों पर मसाले भेजने का ऑर्डर भी मिल चुका है और जल्द ही वे वहां अपने शुद्ध मसाले बेचेंगी, जिससे उनकी इनकम और बढ़ जाएगी।
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