सफलता की कहानी: घर से शुरू हुआ छोटा सा सफर, आज शहर का मशहूर ब्रांड बना ओम नमकीन भंडार व्यापार 2 महीने पहले 100
खंडवा के देवनारायण चौक पर स्थित ओम नमकीन भंडार ने 45 वर्षों में अपनी शुद्धता और स्वाद से एक खास पहचान बनाई है। अब पिता की विरासत को उनके बेटे नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

खंडवा की गलियों से शुरू हुई कामयाबी की दास्तान

मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित देवनारायण चौक, जिसे लोग जलेबी चौक के नाम से भी जानते हैं, वहां एक ऐसी दुकान है जिसने स्वाद के दम पर अपनी एक अलग दुनिया बसाई है। यह है ओम नमकीन भंडार। आज यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है, लेकिन इसकी शुरुआत किसी आलीशान शोरूम से नहीं, बल्कि एक छोटे से घर से हुई थी। करीब 45 साल पहले मांगीलाल सावले ने जिस ईमानदारी और मेहनत के साथ नमकीन बनाने का काम शुरू किया था, आज वह एक बड़े और भरोसेमंद पारिवारिक व्यवसाय का रूप ले चुका है।

45 साल पुरानी बुनियाद

इस कारोबार की नींव रखने वाले मांगीलाल सावले पहले एक होटल में कार्यरत थे। वहां काम करते हुए उन्होंने नमकीन बनाने की कला में महारत हासिल कर ली थी। उनके हाथों से बने नमकीन का स्वाद लोगों को इतना भाया कि उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने की ठान ली। शुरुआत में उन्होंने अपने घर से ही सेव और मिक्सचर जैसे नमकीन बनाना शुरू किया और बाद में देवनारायण चौक पर अपनी दुकान की स्थापना की। उनकी मेहनत रंग लाई और दुकान धीरे-धीरे शहर के लोगों की पहली पसंद बन गई।

दूसरी पीढ़ी ने संभाली कमान

समय के साथ यह कारोबार अब अपनी अगली पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है। मांगीलाल सावले के बेटे रविंद्र सावले और जीतेंद्र सावले अब इस पूरे व्यवसाय को संचालित कर रहे हैं। दोनों भाई बीते कई वर्षों से अपने पिता की सिखाई गई कला को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। जीतेंद्र सावले का मानना है कि व्यापार में टिके रहने के लिए पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखना सबसे जरूरी है। वे बताते हैं कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया था कि अगर काम में ईमानदारी हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

ताजगी और शुद्धता का मंत्र

ओम नमकीन भंडार की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण ताजगी है। जीतेंद्र सावले के अनुसार, वे एक दिन छोड़कर अपने घर पर ही ताजा नमकीन तैयार करते हैं। बाजार में बिकने वाले अन्य उत्पादों की तुलना में यहां ग्राहकों को हमेशा ताजी सामग्री मिलती है। गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करना ही इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत है। यही कारण है कि यहां आने वाले ग्राहक बार-बार वापस आते हैं और नए लोगों को भी दुकान के बारे में बताते हैं।

दुकान पर मिलने वाले खास उत्पाद

इस नमकीन भंडार की वैरायटी काफी विस्तृत है। यहां ग्राहकों के बीच पोहा लहसुन सेव, लौंग सेव, कश्मीरी सेव और कश्मीरी पापड़ी की बहुत मांग रहती है। इसके अलावा, दाल दाने, मसूर दाल और पारंपरिक गठिया भी यहां के लोकप्रिय उत्पाद हैं। इनमें भी सेव और मिक्सचर ऐसे नमकीन हैं, जिन्हें लोग सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। दुकान पर आने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि स्वाद के मामले में यह स्थान किसी भी बड़े ब्रांड से कम नहीं है।

पीढ़ियों का अटूट भरोसा

इस दुकान की एक और दिलचस्प बात यह है कि यहां आने वाले ग्राहकों में अब दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी शामिल हो गई है। जो लोग कभी अपने दादा-परदादा के साथ यहां नमकीन खाने आया करते थे, वे आज अपने बच्चों को लेकर यहां पहुंचते हैं। स्वाद का जो सफर 45 साल पहले शुरू हुआ था, वह आज भी वैसा ही बना हुआ है। रविंद्र और जीतेंद्र सावले ने अपनी नौकरी छोड़कर पिता के काम को चुना, और उन्हें इस फैसले पर पूरा गर्व है। वे कहते हैं कि अपना काम करने में जो संतुष्टि है, वह कहीं और नहीं मिल सकती।

किफायती और बेहतरीन स्वाद

इतनी गुणवत्ता और स्वाद के बावजूद, ओम नमकीन भंडार अपने उत्पादों को बेहद किफायती दाम पर बेचता है। यहां नमकीन की कीमत करीब 280 रुपये प्रति किलो है। इस बजट के अनुकूल दाम के कारण आम आदमी से लेकर हर वर्ग के लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। मेहनत, परंपरा और भरोसे की यह कहानी साबित करती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम यदि समर्पण के साथ किया जाए, तो वह निश्चित रूप से बड़े मुकाम तक पहुंचता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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