आजमगढ़: किसान राकेश राय ने केले की खेती से बदली तस्वीर, 2 बीघे में उगाए 1 हजार पौधे व्यापार 2 महीने पहले 88
आजमगढ़ के तहबरपुर निवासी प्रगतिशील किसान राकेश राय ने आधुनिक तकनीक अपनाकर केले की खेती में सफलता की मिसाल कायम की है। नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के अनुदान और सही योजना से वे लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।

खेती में नवाचार से बदल रही है किसानों की आर्थिक स्थिति

आज के दौर में कृषि केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह गई है। आजमगढ़ जिले के किसान अब व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाते हुए खेती को लाभ का सौदा बना रहे हैं। कृषि के क्षेत्र में हो रहे तकनीकी विकास के चलते अब किसान कम लागत और सीमित समय में बेहतर पैदावार प्राप्त कर रहे हैं। आजमगढ़ जनपद के तहबरपुर क्षेत्र में रहने वाले किसान राकेश राय इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने खेती को एक व्यापार की तरह अपनाते हुए न केवल अपनी आय को दोगुना किया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं।

केले की व्यावसायिक खेती का सफल मॉडल

प्रगतिशील किसान राकेश राय ने अपने 2 बीघे के खेत में केले के पौधों की बागवानी शुरू की है। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से कुल 1 हजार केले के पौधे लगाए हैं। राकेश राय बताते हैं कि यदि केले की सही देखभाल और पोषण किया जाए, तो एक पेड़ से औसतन 30 से 35 किलो तक केले की पैदावार आसानी से प्राप्त की जा सकती है। यह पैदावार सीधे तौर पर किसान की आर्थिक उन्नति में योगदान देती है।

लाखों की कमाई और बाजार की संभावनाएं

केले की खेती के वित्तीय पहलुओं पर चर्चा करते हुए राकेश राय स्पष्ट करते हैं कि एक सीजन के भीतर ही वे लाखों रुपए का मुनाफा कमाने में सक्षम हैं। बाजार में केले की मांग बनी रहती है और भाव में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह एक लाभकारी फसल सिद्ध होती है। सीजन के अनुसार, बाजार में केला कभी-कभी 20 से 25 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिकता है। इस तरह, कम लागत में केले की व्यवस्थित खेती करना किसानों के लिए एक शानदार विकल्प है। उनका मानना है कि जिसे कभी छोटा काम समझा जाता था, उसे आज आधुनिक प्रबंधन के साथ करने पर बहुत कम समय में बड़ी कमाई की जा सकती है।

सरकारी सहायता और नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन

किसानों के लिए सबसे राहत भरी बात यह है कि उद्यान विभाग उन्हें इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करता है। सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक सहायता और अनुदान प्रदान किया जाता है ताकि वे बड़े स्तर पर फलों की खेती कर सकें। मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के अंतर्गत यदि किसान केले की खेती अपनाते हैं, तो वे डेढ़ लाख रुपए तक का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। यह वित्तीय प्रोत्साहन उन छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो अपनी खेती को व्यावसायिक रूप देना चाहते हैं।

एक साथ कई फसलों से अतिरिक्त लाभ

राकेश राय केवल केले की खेती पर ही निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे खेती के हर इंच जमीन का बुद्धिमानी से उपयोग कर रहे हैं। वे बताते हैं कि केले के पौधों के बीच खाली बची हुई जगह का इस्तेमाल अन्य तरह की सब्जियों की बुवाई के लिए किया जा सकता है। इससे किसान को एक ही समय में एक साथ एक से अधिक फसलों का उत्पादन मिलता है। इस प्रकार की मिश्रित खेती से किसान न केवल अपनी मुख्य फसल से लाभ कमाते हैं, बल्कि सब्जियों की बिक्री से अतिरिक्त कमाई भी सुनिश्चित करते हैं।

कृषि क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता

आजमगढ़ में अब ऐसे कई किसान सामने आ रहे हैं जो आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सब्जी और फलों की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। ये किसान नई-नई कृषि विधियों का प्रयोग कर रहे हैं जिससे फसल की गुणवत्ता भी बढ़ती है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है। राकेश राय की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाए, तो खेती के क्षेत्र में मेहनत का फल निश्चय ही लाखों में प्राप्त किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि व्यावसायिक सोच के साथ किया गया प्रयास आज के समय में सफलता की कुंजी है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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