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एक घंटा पहले
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मेहनत के दम पर बुलंदियों की ओर
सपनों को पूरा करने के लिए केवल मजबूत इरादों की जरूरत होती है, न कि भारी संसाधनों की। इस बात को बिहार के भागलपुर जिले के परबत्ती इलाके में रहने वाले प्रिंस ने सच साबित कर दिखाया है। आर्थिक तंगी की बेड़ियों को तोड़ते हुए प्रिंस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले प्रिंस का चयन पंचक सिलाट खेल में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। जब उनकी सफलता के पीछे की कहानी जानने के लिए टीम वहां पहुंची, तो प्रिंस के छोटे से घर की एक दीवार पर सजे ढेरों मेडल और प्रशस्ति पत्र उनकी कड़ी मेहनत की गवाही दे रहे थे। यह साधारण से दिखने वाले घर की असाधारण उपलब्धि है, जो बताती है कि सफलता के लिए दृढ़ संकल्प ही काफी है।
साल 2012 से शुरू हुआ सफर
प्रिंस मूल रूप से एक मार्शल आर्ट खिलाड़ी हैं, जिसे पंचक सिलाट के नाम से जाना जाता है और इसकी उत्पत्ति इंडोनेशिया से हुई है। उन्होंने इस खेल में अपने सफर की शुरुआत साल 2012 में की थी। प्रिंस का प्रशिक्षण किलकारी भवन में चल रहा है। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने बताया कि वह रोजाना मैदान पर पांच घंटे तक पसीना बहाते हैं। इसी अटूट मेहनत और लगन का नतीजा है कि आज उनका चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। प्रिंस ने बताया कि उनके पिता का भी खेल की दुनिया में बहुत रुचि थी और वह चाहते थे कि एक खिलाड़ी के रूप में वह आगे बढ़ें, लेकिन किन्हीं कारणों से वे अपना सपना पूरा नहीं कर सके। अब प्रिंस अपने पिता के इसी अधूरे सपने को अपने प्रदर्शन के जरिए पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
33 देशों के खिलाड़ी और बिहार का गौरव
आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के बारे में जानकारी देते हुए प्रिंस ने बताया कि उनका चयन अंडर-17 वर्ग के तहत हुआ है, जो कि जूनियर श्रेणी में आता है। इस प्रतियोगिता की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दुनियाभर के करीब 33 देशों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। प्रिंस ने दावा किया है कि इस विशेष कैटेगरी में पूरे बिहार से उनका चयन अकेले हुआ है, जो कि उनके और राज्य के लिए गर्व की बात है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए पदक हासिल करना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वह रोज सुबह-शाम जमकर अभ्यास कर रहे हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी मेहनत सफल होगी।
झालमुड़ी की दुकान और परिवार का संघर्ष
प्रिंस के घर की आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। उनके पिता एक छोटी सी नाश्ते की दुकान चलाते हैं जहां वे झालमुड़ी बेचते हैं। इसी मामूली कमाई से पूरे परिवार का पेट पलता है। प्रिंस चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। खास बात यह है कि उनके बाकी भाई-बहन भी खेल के प्रति जागरूक हैं और वे भी राष्ट्रीय स्तर पर खेल का प्रदर्शन कर चुके हैं। पिता ने भावुक होते हुए बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके बेटे का चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो गया है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हालांकि, बेटे के खेल को आगे बढ़ाने में उन्हें लगातार आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि अगर उन्हें आर्थिक मदद और खेल संबंधी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, तो प्रिंस आने वाले समय में देश के लिए और भी बड़े कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
प्रशिक्षण संस्थान ने की सराहना
प्रिंस की सफलता को लेकर किलकारी के प्रमंडल स्तरीय अधिकारी साहिल राज ने भी उनकी प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि प्रिंस बेहद मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी है और उसका अंतरराष्ट्रीय चयन इसी कड़ी मेहनत का परिणाम है। साहिल राज ने आश्वासन दिया कि प्रिंस को आगे बढ़ाने और उसे हर संभव सहयोग देने के लिए वे पूरी कोशिश करेंगे। उनका यह भी प्रयास रहेगा कि सरकार के स्तर से भी उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके ताकि प्रिंस जैसे प्रतिभावान खिलाड़ी को संसाधनों की कमी का सामना न करना पड़े।
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