बहराइच का 'रॉयल भोग' बासमती बना किसानों की नई कमाई का जरिया, खुशबू का हर कोई कायल व्यापार 2 घंटे पहले 4
उत्तर प्रदेश के बहराइच में उगाए जाने वाले रॉयल भोग बासमती चावल की मांग अब दूसरे जिलों और राजधानी लखनऊ तक पहुंच गई है। एफपीओ मॉडल के सहारे किसान इसे सीधे बाजार में उतारकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश का बहराइच जिला खेती के क्षेत्र में लगातार नई मिसालें पेश कर रहा है। यहां के खेतों में पैदा होने वाला रॉयल भोग बासमती चावल अब सिर्फ जिले की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी भीनी खुशबू दूसरे जिलों के लोगों को भी खूब भा रही है।

बढ़ती मांग से किसानों की आमदनी में उछाल

बाजार में जिस रफ्तार से इस चावल की मांग बढ़ रही है, उसी अनुपात में स्थानीय किसानों की कमाई भी तेजी से बढ़ रही है। यह चावल जितना खुशबूदार है, खाने में उतना ही स्वादिष्ट और भुरभुरा भी होता है। यही खासियत लोगों को इसे चाव से खरीदने पर मजबूर कर रही है। बहराइच के किसान अब एफपीओ के जरिए अपने इस उत्पाद की बेहतरीन ब्रांडिंग कर सीधे बाजार में पहुंचा रहे हैं।

एफपीओ मॉडल बना मजबूत सहारा

हरिहरपुर रैकुंवारी गांव के प्रगतिशील किसान शुभम बताते हैं कि लखनऊ की एक संस्था के सहयोग से बहराइच में एक विशेष किसान एफपीओ चलाया जा रहा है, जिससे इलाके के छोटे और स्थानीय किसानों को जोड़ा गया है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसानों को अपनी उपज कहीं बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। एफपीओ खुद ही गुणवत्ता की जांच करके उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग करता है और फिर उसे सीधे बड़े बाजारों तक पहुंचा देता है।

40 रुपये लागत, 60 रुपये में बिक्री

शुभम के अनुसार, रॉयल भोग बासमती चावल की 1 किलोग्राम की बेहतरीन पैकिंग तैयार करने में करीब 40 रुपये की कुल लागत आती है। इसके बाद यह पैकेट एफपीओ के माध्यम से बाजार में आसानी से 60 रुपये में बिक जाता है। इस तरह प्रति किलोग्राम पर किसानों को सीधा और अच्छा मुनाफा मिल रहा है। चावल की शुद्धता और खुशबू के चलते इसकी खपत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

लखनऊ में सबसे ज्यादा मांग

बहराइच के स्थानीय बाजार में इस चावल की खपत करीब 200 किलोग्राम प्रति महीना है, लेकिन इसकी सबसे अधिक मांग राजधानी लखनऊ में है। लखनऊ में किसानों के इन उत्पादों को बेचने के लिए एफपीओ ने खुद इंडिगो के साथ मिलकर एक बड़ा मार्ट भी चलवाया है। वहां सीधे ग्राहक से लेन-देन के जरिए किसानों का उत्पाद बिना किसी बिचौलिए के बहुत अच्छे दामों पर बिक जाता है।

गांव के नाम पर रखा संगठन का नाम

बहराइच के किसानों ने अपने इस संगठन का नाम गांव के नाम पर ‘श्री हरिहर ग्रासफील्ड प्राइवेट लिमिटेड किसान एफपीओ’ रखा है। इस केंद्र पर पहुंचकर कोई भी ग्राहक सीधे किसानों के हाथों तैयार किया हुआ शुद्ध रॉयल भोग बासमती चावल खरीद सकता है। इसके अलावा, इस एफपीओ के जरिए सेहत के लिए लाभकारी मोटे अनाजों का शुद्ध आटा और खेती से जुड़े कई अन्य बेहतरीन उत्पाद भी आसानी से वाजिब दामों पर खरीदे जा सकते हैं। इस आधुनिक पहल से बहराइच के किसानों का जीवन स्तर तेजी से सुधर रहा है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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