झारखंड
2 महीने पहले
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विचारों
यूट्यूब से मिली खेती की नई राह
आज के दौर में किसान पारंपरिक फसलों से हटकर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर शानदार कमाई कर रहे हैं। झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड स्थित परसाबेड़ा गांव के निवासी शरद महतो ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने पारंपरिक खेती के तरीकों को पीछे छोड़ते हुए यूट्यूब पर उपलब्ध वीडियो से आधुनिक तकनीक सीखी और आज अपनी मेहनत के दम पर सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। शरद महतो के लिए खेती अब केवल गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि मुनाफे वाला व्यवसाय बन गई है, जिससे वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक आदर्श बन गए हैं।
मचान विधि और फसल की विशेषताएं
शरद महतो बताते हैं कि उनका परिवार पुस्तैनी तौर पर खेती से जुड़ा है, लेकिन लंबे समय तक धान की पारंपरिक खेती करने के बावजूद उन्हें सीमित आमदनी ही मिल पाती थी। बेहतर आय की तलाश में उन्होंने नए विकल्पों पर विचार किया और इंटरनेट के माध्यम से मचान विधि से सब्जी उत्पादन के बारे में जानकारी जुटाई। उन्होंने अप्रैल के महीने में अपने एक एकड़ खेत में नेनुआ की बुवाई की थी। इस फसल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बुवाई के करीब 50 से 60 दिनों के भीतर ही तैयार हो जाती है। सबसे अधिक फायदा इस बात का मिलता है कि एक बार पहली तुड़ाई शुरू होने के बाद अगले दो महीने तक निरंतर फल प्राप्त होते रहते हैं, जिससे किसानों को नियमित तौर पर कमाई होती रहती है।
लागत और मुनाफे का गणित
खेती में होने वाले खर्च और कमाई के आंकड़ों पर बात करते हुए शरद ने बताया कि एक एकड़ खेत में नेनुआ उगाने के लिए उन्हें लगभग 15 हजार रुपये की कुल लागत लगानी पड़ी। पूरी फसल अवधि के दौरान उन्हें करीब 60 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है। वे अपनी तैयार सब्जी को बोकारो की सेक्टर-5 सब्जी मंडी में ले जाकर बेचते हैं, जहां उन्हें थोक भाव में 25 से 30 रुपये प्रति किलो का दाम मिल जाता है। यदि औसतन 60 क्विंटल उत्पादन और 25 रुपये प्रति किलो का भाव जोड़ा जाए, तो कुल बिक्री से करीब 1.50 लाख रुपये की आमदनी होती है। इस राशि में से खेती की लागत घटाने के बाद उन्हें 1.35 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।
अन्य किसानों के लिए सलाह
सफलता के इस सूत्र को साझा करते हुए शरद महतो ने साथी किसानों को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। उनका मानना है कि नेनुआ की अच्छी फसल के लिए समय पर सिंचाई करना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, खेत की नियमित निगरानी और कीट-रोग प्रबंधन पर पूरा ध्यान देना चाहिए। यदि सही समय पर कीड़ों का नियंत्रण नहीं किया गया, तो पूरी फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कम लागत और अधिक मुनाफा देने के कारण उन्होंने अन्य किसानों को भी वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दी है।
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