घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा के वास्तु नियम: इन गलतियों से हो सकती है आर्थिक तंगी धर्म एक घंटा पहले 2
वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। घर की सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए इस दिशा से जुड़ी वास्तु सावधानियों का पालन करना अनिवार्य है।

दक्षिण-पश्चिम दिशा का महत्व

वास्तु शास्त्र में घर की प्रत्येक दिशा का अपना एक विशेष प्रभाव होता है, लेकिन दक्षिण-पश्चिम यानी साउथ-वेस्ट दिशा को सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। यह दिशा न केवल परिवार के आपसी संबंधों और घर की स्थिरता को दर्शाती है, बल्कि घर की आर्थिक स्थिति को निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दिशा में की गई छोटी सी चूक भी आपके जीवन में बड़ी मुसीबतें खड़ी कर सकती है।

घर के मुखिया और तिजोरी का स्थान

बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, दक्षिण और पश्चिम दिशा के बीच का स्थान घर के मुखिया के रहने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। घर का मास्टर बेडरूम इसी दिशा में होना सबसे उत्तम होता है। धन संबंधी सुरक्षा के लिए इस दिशा में तिजोरी या कीमती सामान रखने वाली अलमारी रखी जा सकती है। ध्यान रहे कि तिजोरी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि उत्तर को कुबेर की दिशा माना गया है, जो धन के आगमन का मार्ग खोलती है।

इन बातों का रखें खास ख्याल

वास्तु के अनुसार कुछ कार्य इस दिशा में करने से बचना चाहिए:

  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में कभी भी रसोईघर का निर्माण नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, रसोई के लिए अग्नि कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा ही सबसे शुभ होती है।
  • इस दिशा में पूजा घर बनाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह स्थान घर में स्थिरता के लिए है।

यदि इन वास्तु नियमों की अनदेखी की जाती है, तो घर में अनावश्यक परेशानियों का दौर शुरू हो सकता है, जिससे धन की हानि और कलह जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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