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2 घंटे पहले
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच गहराया सीमा विवाद
पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर से तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के भीतर किए गए हवाई हमले ने इस आग में घी डालने का काम किया है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद अफगान तालिबान भड़क गया है और उसने इस्लामाबाद को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। तालिबान के एक वरिष्ठ मंत्री ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को चेताते हुए कहा है कि वह अफगानिस्तान के इतिहास को न भूले। उन्होंने यहां तक दावा कर दिया कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो वे केवल दो दिन के भीतर पाकिस्तान के पेशावर शहर में अपना झंडा फहरा सकते हैं।
तालिबान मंत्री की पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी को चेतावनी
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में सीमा और जनजातीय मामलों के मंत्री नूरुल्लाह नूरी ने पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी को साफ तौर पर चेतावनी दी है। काबुल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए नूरुल्लाह नूरी ने कहा कि पाकिस्तान को अफगान नागरिकों के सब्र का इम्तिहान लेने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत अफगानिस्तान के हौसलों के सामने टिक नहीं पाएगी।
नूरुल्लाह नूरी ने इस दौरान एक बेहद आक्रामक बयान देते हुए दावा किया कि यदि इस्लामिक अमीरात चाहे, तो वे दो दिन के भीतर ही पेशावर में अफगानिस्तान का झंडा लहरा सकते हैं। ज्ञात हो कि पेशावर पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा शहर है, जो अफगानिस्तान की सीमा से बहुत अधिक दूरी पर स्थित नहीं है। ऐसे में तालिबान के वरिष्ठ मंत्री की तरफ से पेशावर को लेकर दिया गया यह बयान केवल एक सामान्य बयान नहीं है, बल्कि इसे पाकिस्तान के लिए एक सीधी और बड़ी सैन्य चुनौती माना जा रहा है।
इतिहास से सबक लेने की दी नसीहत
अपने संबोधन में नूरुल्लाह नूरी ने पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसियों को अफगानिस्तान के इतिहास और वहां की राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों को गहराई से समझने की सलाह दी। उन्होंने दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों का उदाहरण देते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाने की कोशिश की। नूरी ने कहा कि:
- सोवियत संघ की असफलता: सोवियत संघ ने अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ अफगानिस्तान में पैर जमाने की कोशिश की थी, लेकिन वह बुरी तरह नाकाम रहा और उसे पीछे हटना पड़ा।
- अमेरिका की वापसी: सोवियत संघ के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी आधुनिक और शक्तिशाली सेना भी दो दशकों तक अफगानिस्तान में रहने के बावजूद अपने मंसूबों को हासिल नहीं कर सकी और उसे आखिरकार यहां से जाना पड़ा।
तालिबान मंत्री का इशारा पूरी तरह से पाकिस्तान की ओर था कि जब सोवियत संघ और अमेरिका जैसी महाशक्तियां अफगानिस्तान के लोगों के जज्बे को नहीं डिगा सकीं, तो पाकिस्तान की क्या हैसियत है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की ताकत और उसके नागरिकों को कमजोर आंकना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक भूल साबित हो सकती है। नूरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां और उसकी फौज बार-बार हवाई हमले करके अफगानों के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं, जो उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
हवाई हमलों के बाद भड़का है काबुल
यह पूरा विवाद और दोनों देशों के बीच तनाव उस समय और अधिक बढ़ गया जब गुरुवार की सुबह पाकिस्तान की वायुसेना ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर हवाई हमले किए। इस हमले को लेकर पाकिस्तान की ओर से यह दलील दी जा रही है कि उसने सीमा पार सक्रिय आतंकवादियों के ठिकानों और ड्रोन हमलों से जुड़े ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस्लामाबाद का दावा है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान के भीतर हमलों को अंजाम देते हैं और फिर अफगान सीमा में जाकर छिप जाते हैं।
दूसरी तरफ, अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बैठी तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तालिबान का कहना है कि यह हमला उनकी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है और वे अपनी जमीन पर किसी भी बाहरी देश की सैन्य कार्रवाई को कतई स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इसे अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता पर हमला करार दिया है।
टकराव नहीं चाहता अफगानिस्तान, लेकिन जवाब देने को तैयार
नूरुल्लाह नूरी ने अपने भाषण के अंत में यह भी स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान अपने किसी भी पड़ोसी देश के साथ सैन्य टकराव या युद्ध की स्थिति नहीं चाहता है। उनका कहना था कि इस्लामिक अमीरात शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति में विश्वास रखता है। हालांकि, उन्होंने कड़े लहजे में यह भी जोड़ दिया कि अगर अफगानिस्तान पर किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव डाला गया या उसके खिलाफ सैन्य हमले किए गए, तो उनके सैनिक और देश की जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
वर्तमान समय में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। दोनों ही देश एक-दूसरे पर सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने और संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पाकिस्तान जहां तालिबान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाता है, वहीं तालिबान इन आरोपों को नकारते हुए पाकिस्तान पर हवाई हमले करने और उनकी संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाता है। इस नए घटनाक्रम ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच दुश्मनी की खाई को और चौड़ा कर दिया है।
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