विश्व
एक घंटा पहले
7
विचारों
वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका का कड़ा कदम
अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी समझौते पर पहुंचने की कोशिशें पूरी तरह विफल साबित हुईं। हालात इतने बिगड़ गए कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत के बेनतीजा रहने के तुरंत बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका छोड़ने का फरमान सुना दिया। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल थे।
क्या थी बातचीत की पृष्ठभूमि
इस पूरी प्रक्रिया में कतर एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। कतर के अधिकारी अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐसा समझौता प्रस्ताव रखने की कोशिश कर रहे थे, जिससे दोनों देशों के बीच गतिरोध कम हो सके। हालांकि, दोनों ही पक्ष अपनी पूर्व निर्धारित शर्तों पर अड़े रहे और किसी भी तरह की रियायत देने को तैयार नहीं हुए। बातचीत के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि दोनों देशों के बीच विश्वास की खाई बहुत गहरी है और किसी भी समझौते तक पहुंचना फिलहाल संभव नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन का सख्त आदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार सुबह व्हाइट हाउस को यह उम्मीद थी कि ईरान के साथ होने वाली वार्ता में कुछ सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है। हालांकि, दिन ढलते-ढलते स्थिति स्पष्ट हो गई और यह तय हो गया कि कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल रहा है। इसके बाद, मार्को रुबियो के निर्देश पर संयुक्त राष्ट्र में स्थित अमेरिकी मिशन ने ईरानी मिशन को स्पष्ट संदेश भेजा कि अब्बास अराघची सहित पूरे प्रतिनिधिमंडल को तुरंत न्यूयॉर्क छोड़ना होगा।
अमेरिकी अधिकारियों की ओर से तर्क दिया गया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपनी मेजबानी की निर्धारित अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रुका था, जिसके चलते उनके निष्कासन का आदेश दिया गया। हालांकि, इस दावे के विपरीत अन्य सूत्रों का कहना है कि अराघची सोमवार रात को ही तेहरान लौटने की योजना बना रहे थे, लेकिन अमेरिकी आदेश ने इस वापसी की प्रक्रिया को और अधिक नाटकीय बना दिया।
रातों-रात न्यूयॉर्क से रवाना हुआ ईरानी दल
अमेरिकी आदेश मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर ईरानी प्रतिनिधिमंडल को एयरपोर्ट के लिए रवाना होना पड़ा। अब्बास अराघची और उनके साथ आए अधिकारी मंगलवार तड़के 1:20 बजे दोहा जाने वाली एक उड़ान में सवार हुए। दोहा पहुंचने के बाद वहां से वे अपने देश ईरान के लिए रवाना हो गए। यह घटनाक्रम कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पर्दे के पीछे बातचीत के रास्ते खुले रखे जाते हैं, लेकिन यहां मामला कूटनीतिक तल्खी के चरम पर पहुंचने का रहा।
अविश्वास की स्थिति और भविष्य की चुनौतियां
अमेरिका और ईरान के बीच यह कड़वाहट साफ तौर पर उजागर हो गई है। भले ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल के जल्दी लौटने की संभावना पहले से जताई जा रही थी, लेकिन जिस तरह से अमेरिकी प्रशासन ने उन्हें वहां से बाहर निकाला, उसने दोनों देशों के बीच के गहरे अविश्वास को दुनिया के सामने ला दिया है। कतर की मध्यस्थता के प्रयास अभी भी जारी हैं, लेकिन फिलहाल दोनों ही देश अपनी स्थिति से इंच भर भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस घटना से यह साफ हो गया है कि कूटनीति के तमाम दांव-पेच के बावजूद, वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की डील होना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
Comments
0 comment