राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
वीरता का एक साहसी उदाहरण
फ्लाई दुबई की उड़ान के दौरान पायलट स्मित मच्छार ने जिस अदम्य साहस और दिलेरी का परिचय दिया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक बेहद चुनौतीपूर्ण और खतरनाक स्थिति में, अपने शरीर पर चाकू के वार सहते हुए उन्होंने विमान में सवार 174 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। उनकी इस वीरता की गूंज अब केवल भारत ही नहीं, बल्कि इजरायल और अमेरिका जैसे देशों तक सुनाई दे रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सार्वजनिक रूप से उनकी बहादुरी की सराहना की है। हालांकि बहुत से लोग इस घटना को एक अचानक घटी आकस्मिकता के रूप में देख सकते हैं, लेकिन यह सच है कि पायलट स्मित मच्छार का यह साहस उनकी रगों में बहुत पहले से दौड़ रहा था।
पॉडकास्ट में पहले ही दी थी चेतावनी
लगभग एक साल पहले स्मित मच्छार ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में भाग लिया था, जिसमें उन्होंने हवा में घटित होने वाली आपातकालीन स्थितियों और फ्लाइट क्रू की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की थी। आज यह घटनाक्रम उसी साक्षात्कार में कही गई उनकी बातों का प्रमाण बन गया है। पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने कहा था, जब हम आकाश में बहुत ऊंचाई पर होते हैं और कोई अनहोनी हो जाती है, तो वहां यात्री को कौन बचाएगा? यदि विमान में कोई डॉक्टर मौजूद हो तो यह यात्रियों का सौभाग्य होता है, लेकिन यदि कोई चिकित्सक नहीं है, तो फ्लाइट क्रू ही वह टीम होती है जो आपकी जान बचा सकती है।
उन्होंने आगे समझाया था कि क्रू मेंबर्स भले ही सर्जरी या जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं में औपचारिक रूप से प्रशिक्षित न हों, लेकिन उन्हें इतने उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे कठिन समय में यात्रियों को सुरक्षित रखने में पूरी तरह सक्षम होते हैं। स्मित ने यह भी टिप्पणी की थी कि लोग फ्लाइट क्रू के बारे में चाहे जो भी राय रखें या उनके साथ कैसा भी व्यवहार करें, लेकिन जब स्थितियां वास्तव में बिगड़ती हैं, तब केवल यही टीम काम आती है। आज एक साल बाद, खुद स्मित ने अपने व्यक्तिगत जीवन में इसी बात को चरितार्थ करके दिखाया है।
कॉकपिट में कदम रखने का पहला अनुभव
साक्षात्कार के दौरान उनसे यह भी पूछा गया था कि जब उन्होंने पहली बार एक पायलट के रूप में कॉकपिट में कदम रखा था, तो उनका अनुभव कैसा रहा था। इस सवाल के जवाब में स्मित मच्छार ने कहा कि कोई भी पायलट अपने करियर के उस महत्वपूर्ण पल को कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने याद करते हुए बताया कि उनकी पहली कमर्शियल फ्लाइट ट्रेनिंग बेंगलुरु से दिल्ली के मार्ग पर थी। स्मित ने कबूल किया कि वह अनुभव काफी डरावना था। उन्होंने बताया कि उस दौर में विमानन क्षेत्र में बोइंग (Boeing) एक बाजार अग्रणी कंपनी हुआ करती थी, इसलिए उनकी हमेशा से चाहत थी कि वे बोइंग उड़ाएं। उनका पहला विमान भी बोइंग ही था और उन्होंने अपने पूरे करियर में अधिकतर समय इसी विमान को उड़ाया है।
विमान सुरक्षा और क्रू की भूमिका पर राय
पॉडकास्ट में विमान सुरक्षा को लेकर भी तीखे सवाल पूछे गए। जब उनसे हालिया समय में विमान दुर्घटनाओं और बोइंग विमानों की सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं पर सवाल किया गया, तो स्मित ने बिना किसी संकोच के अपने विचार रखे। जब उनसे पूछा गया कि क्या जांच प्रक्रियाओं में कमी है या आखिर विमान में सवार 270 लोग पलक झपकते ही काल के गाल में कैसे समा जाते हैं, तो उन्होंने उद्योग की बदलती धारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले लोग कहा करते थे कि अगर बोइंग नहीं, तो मैं नहीं जाऊंगा, लेकिन वर्तमान में लोग अब यह कहने लगे हैं कि अगर बोइंग है, तो मैं उड़ान नहीं भरूंगा।
इस गंभीर विषय पर अपनी बात रखते हुए स्मित ने एक पुरानी घटना साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उड़ान के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि एक महिला यात्री, जो गर्भावस्था के शुरुआती दौर में है, उसे प्रसव पीड़ा जैसे दर्द का सामना करना पड़ रहा है। कॉकपिट में सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया और कुछ ही मिनटों बाद उन्हें संदेश मिला कि विमान में एक बच्चे का जन्म हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब चीजें नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं, तब यात्रियों को क्रू के कौशल की ही आवश्यकता होती है और वे उस स्थिति को संभालने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। उनकी यह दिलेरी अब कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
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