अस्थमा के मरीजों के लिए वरदान है बकरी का दूध, 90 दिनों में स्वास्थ्य में दिखेगा बड़ा बदलाव जीवनशैली एक घंटा पहले 6
कोडरमा के आयुष विशेषज्ञ ने अस्थमा से परेशान लोगों को बकरी का दूध पीने की सलाह दी है। इसे नियमित रूप से 90 दिनों तक इस्तेमाल करने से फेफड़ों और सांस संबंधी समस्याओं में काफी राहत मिल सकती है।

अस्थमा के लिए घरेलू उपाय

अगर आप काफी लंबे समय से अस्थमा जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं और पारंपरिक इलाज के साथ ही किसी घरेलू उपाय की तलाश में हैं, तो यह जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी हो सकती है। कोडरमा जिले के जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार ने अस्थमा के मरीजों के लिए बकरी के दूध को अत्यंत गुणकारी बताया है। उन्होंने कहा कि सही खानपान और दिनचर्या में छोटे बदलावों के जरिए अस्थमा के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

सेवन का सही तरीका और समय

डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, अस्थमा पीड़ितों के लिए बकरी का दूध किसी संजीवनी से कम नहीं है। उन्होंने इसके सेवन की विधि समझाते हुए कहा कि मरीजों को सुबह और शाम, दोनों समय एक-एक कप बकरी का दूध गर्म करके पीना चाहिए। यह प्रक्रिया कम से कम 90 दिनों तक लगातार जारी रखनी चाहिए। नियमित रूप से इसका सेवन करने पर मरीज को अपनी स्थिति में सकारात्मक और जादुई असर महसूस होने लगेगा।

दवाएं बंद करना है जोखिम भरा

आयुष चिकित्सा पदाधिकारी ने मरीजों को एक खास चेतावनी भी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बकरी का दूध एक सहायक उपाय है, इसे अस्थमा के मुख्य इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। यदि कोई मरीज पहले से ही एलोपैथिक दवाएं या इनहेलर का उपयोग कर रहा है, तो उन्हें इसे बिल्कुल बंद नहीं करना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को नियमित रूप से लेना अनिवार्य है। घरेलू उपाय को मुख्य उपचार के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए, न कि उसे दवा का स्थान लेने देना चाहिए।

अस्थमा और फेफड़ों पर असर

डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि अस्थमा असल में सांस की नलियों से जुड़ी एक लंबी अवधि तक चलने वाली बीमारी है। इसमें फेफड़ों तक हवा पहुंचने में रुकावट आती है, जिससे सीने में जकड़न, खांसी और सांस लेने में गंभीर तकलीफ होती है। बकरी का दूध फेफड़ों में जमा होने वाले कफ को रोकने में मदद करता है और श्वसन मार्ग में होने वाली सूजन को भी कम करने का कार्य करता है। यह दूध पाचन के लिए भी बहुत हल्का होता है और शरीर के पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव नहीं डालता है।

सावधानी बरतना भी है जरूरी

विशेषज्ञ ने यह भी सलाह दी है कि दूध के सेवन के साथ ही मरीजों को अपने वातावरण पर भी ध्यान देना चाहिए। अस्थमा से पीड़ित लोगों को धूल, धुआं और बाहरी प्रदूषण से पूरी तरह बचाव करने की कोशिश करनी चाहिए। इन बाहरी कारकों से दूरी बनाकर और बकरी के दूध के 90 दिनों के नियमित सेवन से फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार आता है और सांस लेने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज हो जाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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