जब बिहार विधानसभा में पहली बार एक किसान ने रखी अपनी बात, बदल गई कृषि नीति; जन लोकपाल बिल कमेटी में मिली जगह बिहार एक घंटा पहले 2
बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ सदस्यों के समक्ष एक किसान ने पूरे 24 मिनट तक अपना पक्ष रखा और राज्य की कृषि व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश की जिसने नीति निर्माताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।

साल 2020 बिहार के कृषि इतिहास में एक विशेष वर्ष के रूप में याद किया जाता है, जब पहली बार किसी जागरूक किसान को सीधे विधानसभा में अपनी बात रखने का विशेष न्योता मिला। न्यू सेक्रेटेरिएट से पास जारी होने के बाद उन्हें जन लोकपाल के दायरे में आने वाले कृषि बिल पर बोलने का यह दुर्लभ मौका दिया गया।

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सदन के वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति में इस किसान ने पूरे 24 मिनट तक अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने बिहार की समृद्ध, मगर चुनौतियों से जूझती कृषि व्यवस्था का ऐसा खाका खींचा कि नीति बनाने वालों को भी नए सिरे से सोचना पड़ा।

भाषण में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

अपने संबोधन में किसान ने बिहार की नाव जैसी भौगोलिक संरचना और उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली नदियों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने गंगा के मैदानी क्षेत्रों में जमा होने वाली गाद (सिल्ट) की समस्या, मिट्टी की सेहत (सॉइल टेस्ट और ट्रीटमेंट) तथा जल संसाधन प्रबंधन की ओर खास तौर पर ध्यान खींचा।

उन्होंने अपनी बात को केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रखा। नदियों, नहरों, स्लुइस गेट और स्टेट बोरिंग के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ उन्होंने डेयरी, गोटरी (बकरी पालन), मत्स्य पालन, सीप पालन, मखाना की खेती तथा फल और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने गौशालाओं के आधुनिकीकरण, देसी नस्ल की गायों के संरक्षण-संवर्धन और A-2 मिल्क को प्रोत्साहन देने की भी पुरजोर पैरवी की।

भाषण का असर और नीतिगत बदलाव

जमीनी अनुभव और तर्कों पर आधारित इस भाषण का प्रभाव इतना गहरा रहा कि सरकार ने कृषि और डेयरी नीतियों में अहम फेरबदल किए। वर्ष 2021 में सरकार ने डेयरी क्षेत्र में दूध के दाम में प्रति लीटर ₹6 से अधिक की बढ़ोतरी कर पशुपालकों को बड़ी राहत पहुंचाई।

इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रैक्टर को फिर से 'मास्टर यंत्र' की सूची में शामिल किया गया, जिसे पहले हटा दिया गया था। इसके बाद किसानों के लिए ट्रैक्टर खरीद पर अनुदान (सब्सिडी) की व्यवस्था भी दोबारा बहाल कर दी गई। इस बदलाव को एक किसान की आवाज से प्रेरित बड़ा नीतिगत सुधार माना गया।

जन लोकपाल बिल कमेटी और किसानों की भागीदारी

साक्षात्कार में किसान ने बताया कि यह आमंत्रण बाबा साहेब के उस विजन और एक्ट के कारण संभव हो सका, जो कृषि प्रधान देश में 80% किसान आबादी के अधिकारों की रक्षा के लिए जन लोकपाल के गठन की बात करता है। अन्ना हजारे के आंदोलनों के बाद वर्ष 2017 में केंद्र और राज्यों में जन लोकपाल का ढांचा तैयार हुआ था।

उन्होंने बताया कि देशभर के 13 राज्यों से आए आवेदनों में से बिहार से केवल उन्हीं का आवेदन वरीयता के आधार पर चुना गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित 'जन लोकपाल बिल कमेटी' में एक राज्यसभा सदस्य, एक लोकसभा सदस्य, केंद्रीय कृषि मंत्री और देश के दो किसान शामिल होंगे, जो आगे चलकर कृषि बजट और नीतियों के निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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