सीकर के सरकारी अस्पतालों में क्यूआर कोड से बनेगी ओपीडी पर्ची, लाइनों से मिलेगी राहत राजस्थान एक घंटा पहले 2
सीकर के सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को लंबी कतारों में नहीं खड़ा होना पड़ेगा। 15 अगस्त के बाद क्यूआर कोड स्कैन करते ही ओपीडी टोकन और पर्ची की सुविधा मिल जाएगी।

डिजिटल तकनीक से मिलेगी राहत

सीकर जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अब ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए घंटों लाइन में इंतजार नहीं करना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पहल की है, जिसके तहत 15 अगस्त के बाद से अस्पतालों में क्यूआर कोड आधारित ओपीडी सेवा शुरू की जाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने से मरीजों का समय बचेगा और उन्हें अस्पताल में प्रवेश करते ही तुरंत टोकन और पर्ची मिल जाएगी।

इन अस्पतालों में मिलेगी सुविधा

यह डिजिटल सुविधा केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी। इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है। इस सेवा का लाभ निम्नलिखित स्थानों पर मिल सकेगा:

  • एसके अस्पताल, सीकर
  • जिले के सभी उप-जिला अस्पताल
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी PHC

कैसे काम करेगी यह व्यवस्था

सीकर के सीएमएचओ डॉ. अशोक महरिया ने जानकारी दी है कि यह पहल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का एक प्रमुख हिस्सा है। अस्पताल परिसर में विशेष क्यूआर कोड बोर्ड लगाए जाएंगे। मरीज जैसे ही अपने फोन से इन कोड को स्कैन करेंगे, उनकी ओपीडी पर्ची और टोकन नंबर तुरंत जनरेट हो जाएंगे। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड भी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, जिसे भविष्य में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

स्मार्टफोन नहीं होने पर क्या होगा

विभाग ने उन मरीजों का भी पूरा ध्यान रखा है जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों के पास तकनीक की उपलब्धता नहीं है, उनके लिए अस्पताल की पुरानी व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी। वे लोग काउंटर पर जाकर शारीरिक रूप से पर्ची बनवा सकेंगे। इस प्रकार, नई डिजिटल तकनीक को वैकल्पिक सुविधा के तौर पर जोड़ा गया है ताकि मरीजों को विकल्प मिल सके और अस्पताल प्रबंधन सुचारू रूप से चल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप