श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज: त्रिवेणी के रक्षक कौन, जिनके दर्शन बिना अधूरी रहती है प्रयाग की तीर्थयात्रा; गजकर्ण राक्षस का किया था अंत धर्म 17 घंटे पहले 4
प्रयागराज में भगवान विष्णु को श्री वेणी माधव के रूप में त्रिवेणी संगम का रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि वेणी माधव के दर्शन के बिना तीर्थराज प्रयाग की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती।

इन दिनों अधिकमास चल रहा है, जिसे भगवान विष्णु की उपासना और उनके तीर्थस्थलों के दर्शन के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ऐसे ही पावन अवसर पर बात तीर्थराज प्रयाग के त्रिवेणी रक्षक की, जो गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम की रक्षा करने वाले देवता माने जाते हैं। कहा जाता है कि त्रेतायुग में इन्होंने गजकर्ण नामक राक्षस का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी, और इनके दर्शन के बिना प्रयागराज की तीर्थयात्रा अधूरी रह जाती है।

त्रिवेणी संगम और उसके रक्षक

प्रयाग में गंगा, यमुना और सरस्वती—इन तीन नदियों के मिलन स्थल को त्रिवेणी संगम कहा जाता है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से समस्त पाप धुल जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचकर त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस संगम की रक्षा स्वयं भगवान विष्णु करते हैं, जिन्हें त्रिवेणी रक्षक के नाम से जाना जाता है। प्रयागराज की तीर्थयात्रा तब तक संपन्न नहीं मानी जाती, जब तक वेणी माधव मंदिर में श्री वेणी माधव के दर्शन न कर लिए जाएं।

इस समय जगत के स्वामी नारायण को प्रिय पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास चल रहा है, जिससे इस मंदिर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि अधिक मास में नारायण के दर्शन-पूजन से कई गुना अधिक फल मिलता है।

त्रेतायुग में गजकर्ण का वध

पौराणिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार श्री वेणी माधव मंदिर का संबंध त्रेतायुग से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि उस काल में राक्षस गजकर्ण के अत्याचारों से तीनों लोकों में भय और अशांति व्याप्त हो गई थी। तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए उसका संहार किया और त्रिवेणी की सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके पश्चात त्रिवेणी की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने प्रयाग में वेणी माधव के रूप में स्थायी रूप से निवास करने का वरदान दिया।

प्रयागराज के प्रमुख देवता

मान्यता है कि तभी से वेणी माधव को प्रयागराज का प्रमुख देवता और त्रिवेणी का रक्षक माना जाने लगा। यही कारण है कि इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर पद्म पुराण में भी उल्लेख मिलता है कि तीर्थराज प्रयाग में भगवान विष्णु वेणी माधव के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर केवल पूजा-स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और पौराणिक इतिहास का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है।

गर्भगृह में शालिग्राम से बनी प्रतिमा

श्री वेणी माधव मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की श्याम वर्ण की शालिग्राम शिला से निर्मित प्रतिमा स्थापित है। इसके साथ ही यहां त्रिवेणी देवी की प्रतिमा भी विराजमान है। दोनों ही प्रतिमाएं काले शालिग्राम पत्थर से बनी हैं। भगवान वेणी माधव को अपने हाथों में शंख और चक्र धारण किए हुए दर्शाया जाता है।

इस मंदिर को ‘नगर देवता’ और ‘लक्ष्मी नारायण मंदिर’ जैसे नामों से भी जाना जाता है। मंदिर के मुख्य द्वार पर ‘नगर देवता’ और ‘माधो सकल काम साधो’ जैसे पवित्र वाक्य अंकित हैं, जो इसकी आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाते हैं।

चैतन्य महाप्रभु का भजन-कीर्तन

इतिहास और भक्ति परंपरा में यह उल्लेख भी मिलता है कि महान संत चैतन्य महाप्रभु ने अपने प्रयाग प्रवास के दौरान इस मंदिर में समय बिताया था और यहां भजन-कीर्तन किया करते थे। इससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

द्वादश माधव में मुख्य स्थान

प्रयागराज में भगवान विष्णु के कुल 12 स्वरूपों की पूजा ‘द्वादश माधव’ के रूप में होती है, जिनमें वेणी माधव को मुख्य माना गया है। अन्य स्वरूपों में चक्र माधव, गदा माधव, पद्म माधव, अनंत माधव, बिंदु माधव, मनोहर माधव, असि माधव, संकट हरण माधव, आदि वेणी माधव, आदि वट माधव और शंख माधव शामिल हैं। मान्यता है कि चक्र माधव ज्ञान और विद्या प्रदान करते हैं, जबकि आदि वट माधव को सृष्टि और प्रलय से जोड़कर देखा जाता है।

कहां स्थित है यह मंदिर

श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज जंक्शन से लगभग सात किलोमीटर दूर दारागंज क्षेत्र के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए रेलवे स्टेशन से ऑटो, रिक्शा और टैक्सी आसानी से उपलब्ध रहती है। मंदिर सड़क मार्ग से भी भली-भांति जुड़ा हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं को पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होती।

दर्शन का समय

मंदिर में दर्शन का समय निर्धारित है। यह सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है। कृष्ण जन्माष्टमी, पूर्णिमा, एकादशी और अनंत चतुर्दशी जैसे विशेष अवसरों पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

पुरुषोत्तम मास के दौरान इस मंदिर में भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। श्रद्धालु यहां आकर न केवल भगवान वेणी माधव के दर्शन करते हैं, बल्कि अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना भी करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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