विश्व
2 घंटे पहले
5
विचारों
नेपाल आपदा और शव शिनाख्त का अजीब संकट
नेपाल में पिछले दिनों आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक आधिकारिक रूप से 1003 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव कार्य के दौरान बरामद हुए शवों की पहचान करना प्रशासन और शोक संतप्त परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस बीच, शव नंबर 1003 को लेकर एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जिसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया है। इस एक शव पर 3 अलग-अलग परिवारों ने अपने परिजन होने का दावा ठोक दिया है, जिससे शव की पहचान को लेकर एक नया संकट खड़ा हो गया है।
क्यों आ रही है पहचान में दिक्कत?
बाढ़ के पानी और मलबे में दबे रहने के कारण बड़ी संख्या में मिले शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई शवों के सड़ने और उनके चेहरों की पहचान मिट जाने के कारण परिजनों के लिए उन्हें पहचान पाना नामुमकिन सा हो गया है। ऐसी स्थिति में, लोग कपड़ों, शरीर की बनावट, किसी विशेष निशान या फिर गहनों के जरिए अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। शव नंबर 1003 की भी यही स्थिति है, जिसकी बदहाली ने किसी की भी पहचान को संदिग्ध बना दिया है।
शव नंबर 1003 पर किसका दावा?
इस शव को लेकर सामने आए दावों की सूची काफी उलझाऊ है:
- पहला दावा बर्दिया से आए एक परिवार ने किया है, जिनका कहना है कि यह जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी गोपाल दहित का पार्थिव शरीर है।
- दूसरा दावा रूपनदेही के एक परिवार द्वारा किया गया है, जो इसे पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल का शव बता रहे हैं।
- रविवार के दिन एक तीसरे परिवार ने भी इस शव पर हक जताया था, हालांकि बाद में उस परिवार ने अपना दावा वापस ले लिया।
फिलहाल दो परिवारों के बीच इस शव को लेकर खींचतान जारी है और दोनों ही पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ शव को अपने परिजन का बता रहे हैं।
वैज्ञानिक तरीके से होगा समाधान
जब मानवीय पहचान के सभी आधार विफल हो गए हैं, तो अब प्रशासन ने इस जटिल समस्या के समाधान के लिए DNA जांच का सहारा लेने का निर्णय लिया है। वैज्ञानिक तरीके से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह शव वास्तव में किस परिवार का है। गौरतलब है कि नेपाल में इस आपदा में अब तक 1003 लोगों की मौत हुई है, जबकि लगभग 4000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन के लिए अब इन लापता लोगों की तलाश और शवों की सही शिनाख्त करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
Comments
0 comment