महाराष्ट्र
एक घंटा पहले
3
विचारों
उद्धव ठाकरे की बैठक में अनुपस्थिति
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना यूबीटी के लिए मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को विधायकों और एमएलसी की एक विशेष बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी की भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होनी थी। हालांकि, इस बैठक में 3 विधायक और 1 एमएलसी की गैर-मौजूदगी ने सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं। शिवसेना यूबीटी के पास कुल 26 सदस्यों का बल है, जिसमें 20 विधायक और 6 एमएलसी शामिल हैं, लेकिन सोमवार को आयोजित इस बैठक में केवल 22 प्रतिनिधि ही पहुंच पाए।
किन नेताओं ने बनाई दूरी
बैठक में शामिल न होने वाले प्रमुख चेहरों में एमएलसी सुनील शिंदे, कलिना से विधायक संजय पोटनिस और परभणी के विधायक राहुल पाटिल का नाम शामिल है। हालांकि पार्टी की ओर से सफाई दी गई है कि इन नेताओं ने बैठक में न आ पाने की जानकारी पहले ही दे दी थी। राहुल पाटिल ने बताया कि वह विधान परिषद चुनाव की मतगणना और उद्धव ठाकरे के आगामी दौरे की तैयारियों में व्यस्त थे। वहीं, सुनील शिंदे का कहना था कि वह अपने गृह नगर चिपलूण में होने के कारण समय पर नहीं पहुंच सके।
सरकार को घेरने की रणनीति
पार्टी ऑफिस 'शिवालय' में हुई इस बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने अपने समर्थकों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने विधायकों से कहा कि वे राज्य सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरें। ठाकरे ने मुख्य रूप से इन विषयों पर जोर दिया:
- अपर्याप्त कृषि ऋण माफी का मुद्दा।
- राज्य में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति।
- महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध।
- ड्रग तस्करी की गंभीर समस्याएं।
शिंदे गुट का बढ़ता प्रभाव
एक तरफ उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके कई सांसद उनसे नाता तोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। सोमवार को जब उद्धव अपने नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे, उसी दौरान महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में शिवसेना के 6 सांसद आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पाले में शामिल हो गए। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव गुट के नेताओं को अभद्र भाषा का प्रयोग बंद करना चाहिए, अन्यथा उनकी पार्टी का पतन और तेजी से होगा।
Comments
0 comment