हिमाचल प्रदेश
2 घंटे पहले
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शिमला में जल संकट की स्थिति
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मानसून का दौर शुरू होते ही शहरवासियों के सामने पेयजल का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर मानसून की मार और तकनीकी खराबी का गहरा असर पड़ा है, जिसके चलते स्थानीय लोगों को भारी पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में शहर में जलापूर्ति सुचारू नहीं है और लोगों को अब बारी-बारी से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे दैनिक जीवन पर खासा प्रभाव पड़ रहा है।
सतलुज योजना और तकनीकी खराबी की वजह
शिमला जल प्रबंधन निगम के अनुसार, इस संकट के पीछे मुख्य कारण सतलुज जल आपूर्ति योजना में आई एक बड़ी तकनीकी समस्या है। इस योजना के दूसरे चरण के तहत ड्वाडा स्थित बिजली बोर्ड के ट्रांसफार्मर में तीन दिन पहले अचानक खराबी आ गई थी। इस ट्रांसफार्मर की खराबी के कारण सतलुज नदी से पानी को लिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। यह योजना शिमला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहर को रोजाना लगभग 42 एमएलडी पानी उपलब्ध कराने का कार्य करती है।
सामान्य परिस्थितियों में राजधानी शिमला में पानी की दैनिक खपत करीब 48 से 50 एमएलडी के आसपास रहती है। लेकिन, इस तकनीकी व्यवधान के कारण पानी की कुल उपलब्धता घटकर मात्र 35 से 40 एमएलडी के बीच सिमट कर रह गई है। इस भारी कमी को देखते हुए प्रबंधन के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था कि शहर के विभिन्न इलाकों में पानी की आपूर्ति को सीमित किया जाए। इसी के चलते अब शिमला के निवासियों को एक दिन छोड़कर, यानी तीसरे दिन पानी दिया जा रहा है।
गाद और अन्य चुनौतियां
केवल ट्रांसफार्मर की खराबी ही नहीं, बल्कि बरसात के मौसम में नदियों में आने वाली गाद (सिल्ट) भी पेयजल प्रबंधन के लिए बड़ी बाधा बन गई है। प्रबंध निदेशक राजेश कश्यप ने बताया कि बारिश के कारण जल स्रोतों में अचानक गाद की मात्रा बहुत अधिक बढ़ गई है। इससे वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि, विभाग अन्य पांच जल योजनाओं के जरिए भी पानी का शोधन करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। गाद की इस समस्या से निपटने के लिए विभाग द्वारा 'ट्यूब सैटलर्स' का उपयोग किया जा रहा है और गिरिनदी में प्री-सैटलिंग टैंक जैसे तकनीकी इंतज़ाम भी किए जा रहे हैं ताकि पानी को साफ करके जनता तक पहुंचाया जा सके।
राहत की उम्मीद और विभागीय प्रयास
शिमला जल प्रबंधन निगम और बिजली बोर्ड की संयुक्त टीमें इस समस्या से निपटने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। ड्वाडा में एक बैकअप ट्रांसफार्मर को स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है। निगम के प्रबंध निदेशक राजेश कश्यप ने जानकारी दी है कि इस बैकअप ट्रांसफार्मर को पूरी तरह चालू होने में लगभग दो से तीन दिन का समय और लग सकता है। उन्होंने शहरवासियों को आश्वस्त किया है कि विभागीय टीमें दिन-रात इस चुनौती का सामना करने में जुटी हुई हैं और अगले 3 से 4 दिनों में स्थिति के पूरी तरह सामान्य होने की पूरी उम्मीद है।
जब तक जल आपूर्ति व्यवस्था सुचारू नहीं हो जाती, तब तक के लिए निगम ने यह निर्णय लिया है कि तीसरे दिन दिए जाने वाले पानी की आपूर्ति की समयावधि को बढ़ा दिया जाएगा ताकि आम जनता को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े। साथ ही, बारिश के मौसम में जल जनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए निगम ने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी एक एडवाइजरी भी जारी की है, जिससे लोग पानी से जुड़ी बीमारियों से बच सकें।
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