हिमाचल प्रदेश: किसानों पर सुक्खू सरकार का बड़ा दांव, कृषि ऋण के ब्याज का 50 फीसदी हिस्सा खुद भरेगी सरकार हिमाचल प्रदेश एक महीने पहले 66
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने कर्ज में दबे अन्नदाताओं के लिए एक नई वन-टाइम सेटलमेंट नीति पेश की है, जिसके तहत 3 लाख रुपये तक के कृषि लोन पर 50 प्रतिशत ब्याज की भरपाई सरकार करेगी।

हिमाचल के किसानों को कर्ज से मिलेगी बड़ी राहत

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य के उन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी घोषणा की है, जो लंबे समय से कर्ज के भारी बोझ तले दबे हुए हैं। राज्य सरकार अब वन-टाइम सेटलमेंट यानी एकमुश्त निपटान नीति के तहत एक नई एग्रीकल्चर लोन योजना लागू करने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन किसानों को आर्थिक संकट से बाहर निकालना है, जिनकी जमीनें लोन की अदायगी न हो पाने के कारण नीलामी की कगार पर पहुँच चुकी हैं।

योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ

सुक्खू सरकार की इस विशेष पहल के अनुसार, राज्य सरकार प्रति किसान 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करेगी। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से हिमाचल प्रदेश के लगभग 6,356 किसानों को सीधा लाभ पहुंचने की उम्मीद है। इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए प्रदेश सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान तय किया है।

कैसे काम करेगी यह योजना

इस नई कृषि ऋण योजना के कार्यान्वयन का जिम्मा दो प्रमुख संस्थानों को सौंपा गया है। इसे हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक और कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के माध्यम से संचालित किया जाएगा। संबंधित बैंक की शाखाओं को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के पात्र किसानों की पहचान करें और उनकी एक सटीक सूची तैयार करें, ताकि ब्याज अनुदान का लाभ तय समय पर जरूरतमंदों तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का संदेश

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस योजना के बारे में बात करते हुए स्पष्ट किया कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका सर्वांगीण कल्याण सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के चलते राज्य का एक बड़ा वर्ग आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। इसी के मद्देनजर सरकार ने पात्रता रखने वाले किसानों को यह एकमुश्त राहत देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल से ऋण के नियमितीकरण में मदद मिलेगी और किसान अपनी कृषि गतिविधियों को बिना किसी डर के जारी रख सकेंगे।

नीलामी के खतरे से सुरक्षा

सबसे बड़ी राहत उन किसानों को मिलेगी जिनकी कृषि योग्य भूमि वित्तीय संस्थानों के नोटिस के कारण नीलामी के खतरे में थी। सरकार द्वारा ब्याज का आधा हिस्सा चुकाने से किसानों पर दबाव कम होगा और वे एक नई शुरुआत कर पाएंगे। मुख्यमंत्री ने संबंधित वित्तीय संस्थानों और विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस योजना को बिना किसी देरी के धरातल पर उतारा जाए ताकि किसानों को इसका समय रहते फायदा मिले।

प्राकृतिक खेती और आय बढ़ाने पर जोर

सरकार की प्रतिबद्धता केवल कर्ज राहत तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए ऐतिहासिक समर्थन मूल्य भी प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त खाद्य सामग्री मिल रही है और किसानों की आय में भी इजाफा हो रहा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार हिमाचल में कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती देने और किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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